सबका मालिक एक विचार अनेक
विचार अनेक क्यों
विचार एक बनाओ परम शांति पाओ
जीयो सत बोलकर जियो चाहे 2 दिन झूठ बोलकर 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जिओ जीव कल्याण के लिए जियो चाहे 2 दिन स्वार्थ के लिए 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जब तक ना देखो नैना मत मानो किसी का कहना।
मानो तब जब आप स्वयं अनुभव करके देखलो।
प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है। प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार(वसुधैव कुटुम्बकम्)है और हम सब एक ही पिता की संतान है एक घर से आए हैं और एक ही घर जाना है फिर किस बात का लड़ाई झगड़ा है। परमात्मा ने सबको एक समान शरीर दिया है फिर हम क्यों असमानता में जी रहें हैं। परमात्मा ने किसी के शरीर पर जाति पंथ समाज का बंधन नहीं बांधा फिर हम क्यों इन बंधनों में बंधे बैठे हैं इन सब बंधनों से बाहर निकलो इससे निकलने के बाद आप आजाद हो जाओगे जिससे तनाव दूर होकर स्वस्थ और निर्मल जीवन जिओगे। आओ सब मिलकर प्रेम से रहे और मां प्रकृति के नियमों (सनातन धर्म) पर चलकर सब समस्याओं का समाधान करें जब हम मां प्रकृति के नियमों पर चलेंगे तब मां प्रकृति अपने पुत्र पर मेहरबान होकर सत का रास्ता बताते जाएगी जिससे सब एक सुंदर और भयमुक्त, प्रेमयुक्त जीवन जी सकेंगे।
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| मां प्रकृति से प्रेम और पूजा |
सबका हीरा जन्म और जीवन अनमोल
- क्यों अपने इस जीवन पर तुम मोल लगाए बैठे हो
- फंसकर इस सांसारिकता में मन को झोल लगाए बैठे हो
- मां प्रकृति ने सुंदर दिया यह जीवन क्यों इस तन को घोल लगाए बैठे हो
- हीरा बनाकर भेजा मालिक ने क्यों अपने को जंग लगा लोहा बनाए बैठे हो
- मालिक आवाज देता है हर पल क्यों फिर उसको भुलाए बैठे हो
- 5 तत्व और 25 प्रकृति 10 इंद्री से बना शरीर खुद को जानो क्यों रोग लगाए बैठे हो
- मालिक का ध्यान लगाओ प्यारे क्यों सांसारिक कार्य के लिए रात जगाए बैठे हो
- आओ अपने आप को जानें और परमपिता को सत्य मानें यहां क्यों खुद को फंसाए बैठे हो।
इस संचार के माध्यम से हम आपको ज्ञानवर्धक और खोज करने के बाद अनुभव की हुई बातें बताएंगे खुद से प्रेम, ध्यान कैसे लगाएं, जीवन कैसे जिए दिनचर्या, खुद की खोज, खुद की पहचान, पांच तत्व 25 प्रकृति और 10 इंद्रियों का रहस्य और कर्मों का फल शरीर बीमारी मुक्त कैसे रखें, ब्रह्मचर्य का पालन, पर स्वार्थ जीवन, परमपिता परमात्मा, देवी देवता, संत महात्मा, जीवन के विधि विधान, प्रकृति से शिक्षा, जो पिंड सो ब्रह्मांड यानी बाहर देखकर खुद की खोज करना, संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार, विश्वगुरु भारत। जिससे आप अपने आप को जानकर संसार की ब्रह्म भ्रांतियां और अंधविश्वासों, रोग, लाइलाज बीमारी से दूर रहकर एक सुंदर जीवन जिओगे। और जिसने हमें यह जीवन दिया मां प्रकृति से जुड़ते जाओगे इससे आपको जीवन जीना आ जाएगा और आपकी जिंदगी से संबंधित बहुत से प्रश्नों का उत्तर और बहुत सी समस्याओं का समाधान आप स्वयं ही कर पाओगे क्योंकि प्रकृति से जुड़ने के बाद वह खुद का ज्ञान कराना, शक्ति, भक्ति देना शुरू कर देती है।

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