पक्का सौदा आश्रम रूहानी कॉलेज सदलपुर

रविवार, 8 दिसंबर 2024

जन्मदिन कैसे मनाना चाहिए? जब खुशियां मना रहे हैं तब मोमबत्ती जलानी चाहिए या बुझानी चाहिए?

आज के समय जन्मदिन एक त्यौहार की तरह हो गया है आज हर कोई चाहता है कि मेरा जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाए। आज एक दूसरे की देखा देखी में सोच विचार नहीं करते केवल देखते हैं कि हमारा जन्मदिन दूसरे से बढ़िया होना चाहिए।

असल में बढ़िया कैसे होना चाहिए इसका सही अर्थ लगाना ही भूल गए हैं लोग कि तुझे प्रकृति के अनुसार क्या करना चाहिए?

क्या जन्मदिन मनाना हमारी इच्छा है या आवश्यकता

जन्मदिन केवल इंसान की इच्छा है ना की आवश्यकता इंसान की आवश्यकता पूरा होना जरूरी है इच्छा नहीं लेकिन आवश्यकता के बगैर कोई मनुष्य नहीं रहना चाहिए क्योंकि इच्छा का त्याग करने से मनुष्य जिंदा रह सकता है लेकिन आवश्यकता का त्याग करने से मनुष्य जिंदा नहीं रह सकता।

जन्मदिन मनाना अच्छी बात है लेकिन क्या हमने जाना है कि हमने जो 1 साल बिताया है या पिछले जितने भी साल बिताए हैं उसमें हमने क्या किया क्या ऐसा भी कार्य किया है जिसमें मानवता उभर सके या प्रकृति की रक्षा हो सके लोगों की देखा देखी में कभी मत फंसना जितना कुछ आपके पास हो उसी के हिसाब से चलना जिंदगी में संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है क्योंकि एक बार संतुलन बिगड़ने पर दोबारा संतुलन बनने में बहुत समय लग जाता है। अपनी गुजरी हुई एक साल से पूछे खुद से पूछे कि इस साल मैंने क्या किया और आने वाले नए साल में मुझे क्या करना है। कुकर्म करने से आपका इतिहास छिप जाता है और सुकर्म कार्य करने से आपका इतिहास छप जाता है।

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

जन्मदिन पर मोमबत्ती का जलाना

पाश्चात्य संस्कृति में लोग जन्मदिन पर मोमबत्ती जलाते हैं और फिर फूक मार कर बुझा देते हैं यानी खुद ने ही जला दी और खुद ने ही बुझा दिया आप सोचो और विचार करो खुशियों के समय दीप जलते हैं या बुझाते हैं जब आप दीपावली मनाते हैं। 

तब वह खुशी का त्यौहार होता है तब आप दिया जलाते हैं बुझाते नहीं, दीया जलाना या मोमबत्ती जलाने का अर्थ है जीवन में उजाला करना जब आपने उजाला किया है तो अंधेरा क्यों कर दिया क्या अपनी आगे की जिंदगी को अंधेरे में बिना प्रकाश के ही बिताना चाहते हैं आप सोचो और विचार करो जब भी आप जन्मदिन मनाओ तब दीपक या मोमबत्ती बुझाने नहीं है जलाना है प्रकाश करना है उजाला करना है ताकि आपकी जिंदगी में भी आने वाले सालों में उजाला भर जाए।

जन्मदिन पर केक काटना 

इंसान अच्छी बातों को, कामों को बड़ा देर से सीखता है और बुरे कामों को बहुत जल्दी सीखता है देखा देखी में मत फंसो कुछ विचार करो कि जो हम कर रहे हैं क्या यह सही है?

जब आप केक काटते हैं ठीक है एक दूसरे को खिलाते हैं यह भी ठीक है परंतु वही खाने वाला केक एक दूसरे की देखा देखी में चेहरे पर भी लगा देते हैं खाने की चीज को शोक में बदल दिया सोचो और विचार करो तुम इतने महंगे केक से खेल रहे और वह भी आपकी आवश्यकता नहीं बल्कि इच्छा पूर्ति के लिए परंतु एक जगह कोई एक रोटी के लिए भी तरस रहा होगा।

आपके पैसे हैं फिर इच्छा है खुशी मनाओ खाओ लेकिन व्यर्थ तो मत गवाओ इतना शौक है तब शोक उन गरीबों के बीच में जाकर पूरा करो जो आपको दुआ देंगे आपको बहुत बड़ी खुशी मिलेगी जब आप कभी अकेले होंगे तब यही खुशी आपका अकेलापन दूर कर देगी शरीर में ताकत नहीं होगी तब ताकत भर देगी इसलिए आप खुशी मनाओ अच्छी बात है हमेशा खुश रहना चाहिए। लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के देखा देखी में आप भारतीय संस्कृति को मत भूलो मानवता को मत भूलो। 

उपहार 

जन्मदिन पर उपहार देना सामान्य सी बात है जिंदगी में सब कुछ नष्टमय है आज जो स्थान, वस्तु तुम्हारे पास है वहीं कल किसी और के पास होगी या आपसे खो जाएगी या आप उसे संसार में छोड़कर चले जाओगे जो तुम्हारे काम नहीं आएगी उपहार देवो तो ऐसा उपहार देव जिससे उनको ज्ञान हो उच्च विचार आए, खुद को पहचान सके खुद को जानने के नियम जिससे वह खुद की खोज कर ले क्योंकि मनुष्य के लिए सबसे बड़ा उपहार खुद की खोज करना है खुद को जानना है खुद का अध्ययन करना है। जब वह इसको जान लेता है तब प्रभु का धन्यवाद करता है जिससे उपहार देने वाले को दुआ लगती है।

आज जिन जिन का जन्मदिन है उनको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

आप सदा खुशहाल जीवन जीएं।

धनतेरस और दीपावली की विस्तृत जानकारी, गोवर्धन और भैया दूज का क्या अर्थ होता है?

भारतीय सनातन धर्म संस्कृति में दिवाली का बहुत महत्व है विजयदशमी के दिन राम ने रावण को मारा और फिर दीपावली के दिन अमावस्या को अयोध्या वापस लौटे थे तब उनके आने की खुशी में सभी के घरों में खुशी के दीपक जलाए गए।

शब्दार्थ 

दीप का अर्थ दीपक और अवली का अर्थ कतार। प्रत्येक घर पर दीयों की लंबी कतार लगाई गई। दीयों की इस लंबी कतार को दीपावली कहते हैं। रावण को मार कर सीता को साथ लेकर राम घर लौटे इससे राम के आने की खुशी में दीए जलाए गए तब से लगातार यह त्यौहार हर साल मनाया जाने लगा।

घरों की सफाई 

दिवाली के कुछ दिन पहले ही घरों को सुंदर-सुंदर सजाने लग जाते हैं रंग रोगन मकान की साफ सफाई की जाती है।

धनतेरस यह दिन कृष्ण पक्ष के तेरस के दिन और दीपावली के दो दिन पहले मनाया जाता है यह दिन धन से संबंध रखता है इसलिए इस धनतेरस कहा गया इस दिन चांदी खरीदने का महत्व रखते हैं जो मन से जुड़ी होती है जिससे धन में बढ़ोतरी होती है।

छोटी दिवाली 

चौदस के दिन को छोटी दिवाली के रूप में मनाते हैं जो धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली के 1 दिन पहले होती है इस दिन घर दरवाजे पर एक दीपक जलाया जाता है इस दिन को नरक चौदस भी कहते हैं।

दीपावली 

प्रकाश के महापर्व दीपावली पर आप सभी पर मां लक्ष्मी की रहमत बरसती रहे।

इस दिन शाम के समय में लक्ष्मी की पूजा की जाती है सभी घरों में लक्ष्मी की ज्योत जलाई जाती है यह देवी हमारे हृदय कमल में विराजमान है इसके दो रूप हैं दूसरा रूप सावित्री का है। 

अंधेरे में उजाला 

इस रात चांद दिखाई नहीं देता इसलिए अमावस्या के कारण बहुत अंधेरा रहता है और जब सभी घरों, दुकानों में दीए जलाए जाते हैं रोशनी की जाती है तब सारा देश रोशनी से जगमगा उठता है और वह अंधेरे में जगने वाली रोशनी अंधेरे को दूर कर रोशनी ही रोशनी हो जाती है जब सब लोग घरों को सजाते हैं। सब अपनी-अपने घरों में रोशनी लगते हैं तब उस समय का माहौल बहुत मनमोहक लगता है।

जिस प्रकार अमावस्या के दिन दीए जलने से प्रकाश से अंधेरा दूर होता है इसी प्रकार सभी अपने अंदर की जोत जलाएं ताकि आपका मन रूपी अंधेरा भी दूर हो जाएं। 

घरों में अनेक प्रकार के भोजन 

घरों में अनेक प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं हलवा, खीर, पुडी़, पूडा़, गुलगुला सुहाली, सीरा, मालपुडा़ 

मिठाइयां 

खील गुजरी, लड्डू, बूंदी, जलेबी, चक्की, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, चम-चम, काजू कतली, ग्वार पेठा, बर्फी।

घर से बाहर रहने वाले लोग नौकरी करने वाले या परिवार से दूर रहने वाले लोग इस दिन घर आते हैं वह पूरी साल कमाते रहते हैं लेकिन उनके लिए घर में आने का यह बहुत ही शुभ अवसर है।

अंधविश्वासों से दूर रहे 

इस दिन समाज में ऐसे भी कार्य होते हैं जो मनुष्य को अंधविश्वासों की ओर ले जाते हैं इस दिन टोना टोटका तंत्र-तांत्रिकों से दूर रहकर आपका हृदय में बैठी मां लक्ष्मी की पूजा करें अंधविश्वासों से दूर रहकर सच्चे हृदय से मन प्रकृति के नियमों पर रहकर सबसे प्रेम करें और खुशियों के साथ दीपावली का त्योंहार मनाएं।

दीपावली के दिन प्रदूषण ना फैलाएं 

खुशी के मौके पर पटाखा बम चकरी फुलझड़ी सामान्य सी बात है लेकिन यह सब प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। वायु प्रदूषण करने से बचें क्योंकि प्रकृति को मैं नहीं हम सब मिलकर बचा सकते हैं और जहां हम रहते हैं उस वातावरण को हम शुद्ध नहीं रखेंगे तो कौन शुद्ध रखेगा? अगर हम शुद्ध नहीं रखेंगे तो आने वाले समय में संकटों का सामना हमें ही करना पड़ सकता है इसलिए संकट आए ना उससे पहले ही हम समाधान कर लें।

गोवर्धन 

गोवर्धन की शुभकामनाएं 

गोवर्धन के दिन इस दिन सुबह 4:00 उठकर सभी माता बहने रात को बिखरा हुआ पटाखा आदि का कूड़ा पूरे आंगन से साफ करके सभी जगह से कूड़ा उठाकर एक पोटली बांध लें और जौहर के किनारे डाल आए और कह दे की हे दालद महराज अब 1 साल तक हमारे घर मत आना, हे घर की बुराई हमारे घर 1 साल तक मत आना, जिसे आपका घर सदा आगे बढ़ता जाएगा धन-धान्य रहेगा और किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहेगी।

इसके बाद गाय का गोबर लेकर घर के आगे मुख्य द्वार पर गोवर्धन पूजा करते हैं दीया जलाते हैं बाजरी की सिटी, काचर, बेर, मिठाई, खील गुजरी आदि रखते हैं और गोवर्धन की पूजा करते हैं।

इस दिन गोवर्धन की पूजा जरूर करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन क्या होता है?

जानें गोवर्धन का अर्थ

सबसे पहले यह जानों की शब्द क्या कहता है गो और वर्धन दो शब्दों से मिलकर बना है गो का अर्थ है गाय और वर्धन का अर्थ होता है बढ़ाना यानी गाय को बढ़ावा देना अपने घर में गाय का पालन करना ही गोवर्धन की असली पूजा है।

गाय का पालन करना ही गोवर्धन की पूजा करना है इसलिए गोवर्धन के लिए प्रत्येक घर एक गाय जरूर पालें। जब आप गाय पालन करोगे तब गाय को बचाया जा सकता है इसलिए ही यह त्यौहार मनाया जाता है कि आप गाय माता को ना भूल जाएं।

दीपावली के दूसरे दिन सबसे मेल मिलाप का दिन है इस दिन सब एक दूसरे से मिलने के लिए जाते हैं जिससे एक दूसरे में प्रेम बढ़ता है। 

भैयादूज 

दीपावली के दो दिन और गोवर्धन के एक दिन बाद भैया दूज आती है यह कार्तिक मां की शुक्ल पक्ष की दूज को मनाई जाती है यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है रक्षाबंधन में बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र का धागा बांधती है की भाई सदा अपनी बहन की रक्षा करेगा कभी भी बहन पर अधर्म की आंच नहीं आने देगा।

बहन अपने भाई से अथाह प्रेम करती है और जब उसका भाई खाना खा लेता है तब वह खाना खाती है इस प्रकार से वह यह चाहती है कि उसका भाई उसकी आंखों के सामने रहे इसलिए यह दिन विशेष तौर पर मनाया जाता है। 

दीपावली और गोवर्धन से हमें क्या शिक्षा मिलती है? 

हमेशा अपने अंदर प्रकाश जलाए रखो जिंदगी में कभी भी अंधेरा मत होने दो। 

प्रत्येक घर में गाय का पालन करो। 

इसी के साथ-साथ प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो आप सभी को धनतेरस,दीपावली, गोवर्धन, भैया दूज, की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

शुक्रवार, 22 नवंबर 2024

सत साहेब: जब आप सतगुरु शरण में जाते हैं तब सतगुरु आपसे क्या चाहते है?

प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो सतगुरु सत की ताकत होता है इसलिए जो सत की ताकत है क्या वह किसी से कुछ मांग सकती है? सतगुरु दातार का रूप है इसलिए वह केवल इंसान की बुराइयां मांगते हैं यानी छुड़वाते हैं जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटका, पान, तंबाकू या अन्य नशा विषय की चीजें और अच्छाइयां देता है अच्छा रास्ता बताता है शांति, संतोष, नम्रता, दया, धर्म, सादा जीवन, उच्च विचार का रास्ता बताते हैं।

संत हमेशा सत का रास्ता बताते हैं।

सतगुरु क्या चाहता है? 

संत या सतगुरु संपूर्ण जीव जगत सदा शांति से रहकर जीवन जिए संपूर्ण मानव जाति मानवता के नियम पर रहकर एक आदर्श जीवन जिए सतगुरु यहीं चाहता है। 

पूरा संसार एक परिवार है। 

संत या सतगुरु एक परिवार में सीमित नहीं होता वह पूरे संसार को अपना परिवार मानता है जो इंसान पूरे संसार को अपना परिवार मानता है वह कभी किसी के साथ गलत नहीं करता एक संत के लिए सब एक समान होते हैं वह सब को बढ़ावा देता है।

प्रकृति के अनुसार जीवन और प्रकृति की पूजा 

सतगुरु हमेशा चाहता है कि प्रत्येक मनुष्य प्रकृति के अनुसार जीवन जीए जो इंसान प्रकृति के अनुकूल जीवन जीता है वह सदा निरोग रहता है अपने आप की पहचान होती है जो मनुष्य प्रकृति के अनुसार जीवन जीता है वह खुद बुराई से दूर रहता है खुद से जुड़े सभी लोगों को बुराई से सुरक्षित रखता है ऐसा मनुष्य कभी भी प्रकृति के विरुद्ध नहीं होता वैज्ञानिक शोध भी करता है तब भी प्रकृति के अनुकूल ही करता है।

जिससे किसी भी जीव की हानि नहीं होती सतगुरु कभी भी खुद की पूजा नहीं करवाता वह कहता है कि तुम प्रकृति की पूजा करो क्योंकि प्रकृति ही सर्व शक्तिमान है। हम सब उसकी ही संतान है तुम जल, अग्नि, वायु, धरती, आकाश, सूर्य, चंद्रमा की पूजा करो इसलिए संत नाम सत्य की ताकत का जो जोड़ता परमपिता से तार संत के बताए नियम पर जो चलता उसका हो जाए बेड़ा पार

अंधविश्वास ब्रह्म भ्रांतियां से रहें दूर 

जब तक ना देखो नैना मत मानो किसी का कहना

सतगुरु चाहता है कि तुम किसी भी ब्रह्म शंका में मत फंसो समाज की छोटी-छोटी बातों के पीछे मत भागो उनसे बचकर रहो समाज में रहकर समाज का पालन करें परिवार का पालन करें लेकिन कुल मर्यादा में रहकर जीवन जियो जब आप छोटी-छोटी बातों में नहीं भटकोगे और कुल-मर्यादा में रहकर जीवन जिओगे तब ऐसा जीवन स्वर्ग के समान होता है।

टूना टोटका स्याना सरेवड़ा पूछा दिखाना। 

सतगुरु आपको अंधविश्वास में नहीं रहने देना चाहता आप कभी किसी पुछा वाले के पास जाते हैं वह वहां से संतुष्टि ना मिलने पर कभी किसी दूसरे के पास जाते हैं बहुत से लोग तांत्रिकों के चक्कर में पड़े रहते हैं ।कभी घर में कुछ करवा लिया कभी कुछ करवा लिया खुद के थोड़े से लाभ के लिए दूसरे का बूरा करने में भी पीछे नहीं रहते यह सब करने वाले इंसान की सोच छोटी होती है। वह सब को अपना परिवार नहीं मानते सबका भला सब का विकास नहीं चाहते इसलिए संत चाहता है कि यह सब छोड़ो परमात्मा ने तुम्हें बहुत बड़ा इंसान बनाकर भेजा है खुद की पहचान करो तुमको कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है।

सब कुछ तुम्हारे अंदर है सभी समस्याओं का समाधान परमात्मा ने प्राकृतिक तरीके से तुम्हें दिया है संत यही समझाना चाहते हैं कि तुम भी मेरे जैसे बन सकते हो लेकिन इसके लिए जो मैंने नियम अपना रखे हैं वह अपना लीजिए जिससे आप एक सुखी और संतुष्ट जीवन जी सकेंगे।

अपने आप की पहचान करो 

संत चाहता है कि आप खुद की पहचान करो ताकि आपको जीवन जीना आ जाए जिसे खुद की पहचान की यह खुद को पहचान लिया मिथ्या बातें व्यर्थ की बातें अनावश्यक विचार अनावश्यक काम सब मिट जाते हैं और वह संतुष्ट होकर सदा सुखी जीवन जीता है ।

सब सुखी रहो 

सबको अपना परिवार मानने वाला सबका विकास सबकी खुशी चाहने वाला सदा यह चाहेगा कि हर जीव सदा सुखी रहे इसलिए एक संत सदा चाहता है की सब सुखी रहे और प्रकृति के अनुसार जीवन जीए और मानवता के नियम पर चलकर मानवता कायम करें।

रविवार, 20 अक्टूबर 2024

करवा चौथ का व्रत किस लिए किया जाता है? उसके क्या नियम होने चाहिए?

गृहस्थ जीवन बहुत ही उत्तम जीवन है। यहां रहकर मनुष्य, पति-पत्नी भक्ति करते हैं जो अपने आप को पूर्ण रूप से जानते हैं और घर की मान मर्यादा कुल मर्यादा में रहकर जीवन बिताते हैं उनका जीवन सफल होता है वह सदैव सुखी रहते हैं। गृहस्थ जीवन में नारियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है जिसमें वह चाहती है कि उनके पति की आयु लंबी हो पूर्ण रूप से स्वस्थ रहें उन माता, बेटियों, बहनों के लिए क्या नियम होने चाहिए उन्हीं के बारे में जानिए।

करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।

आप व्रत क्यों रखती है? क्या कारण है?

हर कार्य करने के पीछे एक विधान होता है कि हम जो कार्य कर रहे हैं जो मन में श्रद्धा का भाव है वह क्यों है? किस लिए हैं जो काम हम कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं? यह जानने के बाद जिसने गलत नीतियां अपना रखी है वह सही रास्ते पर आ जाते हैं यानी इन प्रश्नों से आंतत्रिक रूप से अपने आप सुधार आ जाता है। करवा चौथ का व्रत रखने के पीछे नारियों की भावना यहीं रहती है कि उनके पति की आयु लंबी हो स्वस्थ जीवन जिए। जो यह चाहती है कि उनके पति की आयु लंबी हो उनके नियमावली कैसी होनी चाहिए क्योंकि व्रत एक प्रकार से संकल्प होता है और जो जैसी भावना रखती है वह उसका भाव है और भाव के पीछे ही उसके हर कार्य होते हैं। वैसा ही इसका निर्णय और फल होते हैं।

तीन प्रकार की नीतियां 

  •  पहले प्रकार की माता, बहन, बेटियां वह हैं जो ससुराल से पीहर की ओर ले जाती है यानी ससुराल में कितना ही दुखी होते रहें परन्तु वह सदा अपने पीहर की ओर सोचती है।
  • दूसरे प्रकार की माता, बहन, बेटियां वह होती है जो पीहर से ससुराल की ओर ले जाती है यानी पीहर की तरफ माता-पिता कितने ही दुखी होते रहो बेशक परंतु सारा कुछ ससुराल के लिए इकट्ठा कर लेती है। 
  • तीसरे प्रकार की माता, बहन, बेटियां वह होती है जो ना पीहर से लाती है और ना ही ससुराल से पीहर ले जाती हैं यानी अपने पैसे अपने पास रखती है किसी की तरफ हाथ नहीं फैलाती।

आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।

चार प्रकार की मती 

  • चतुर-चतुर नाम चतुराई का, चतुर नारी बहन होती है जो गृहस्थ जीवन के सारे नियम निभाएं और घर में साफ सफाई रखें। अपना कार्य समय पर करें। जो पूर्ण पवित्र रहती है। घर की मान मर्यादा इज्जत रखती हैं। घर में सभी की इज्जत रखती हैं और चतुर नारी होती है।
  • चटोरी-दूसरे प्रकार की चटोरी नारी होती है जो केवल खाने-पीने पर ध्यान देती है बाकी कुछ बिगड़ा रहो। ऐसी नारी को घर की साफ-सफाई, पवित्रता से कोई मतलब नहीं होता। वह केवल खाने-पीने पर ध्यान देती है। कभी कुछ खा लिया कभी कुछ खा लिया।
  • फुहड़-तीसरे प्रकार की फुहड़ नारी होती है जो घर के साफ सफाई नहीं करती घर में गंदगी जमीं रहती है जगह-जगह बदबू आती रहती है यानी घर में गंदगी पड़ी हो बेशक वहीं पर खाना खा लेती है यानी अपने जीवन को हर तरीके गन्दगी में बिताती है।
  • क्लेशन-चौथी प्रकार की कलेक्शन नारी होती है जो 24 घंटा घर में क्लेश करती रहती हैं। कभी किसी बात को लेकर कभी किसी बात को लेकर यानी उसका काम हर वक्त घर में क्लेश करना होता है।

करवा चौथ व्रत की रस्म और नियम 

करवा चौथ पर मेहंदी

करवा चौथ के दिन महिलाएं पहले दिन से तैयारी करती है और अपने हाथ, पैरों को मेहंदी से सजाती है और करवा चौथ के दिन सजती है स्वरती हैं। पूरे दिन भूखे रहकर दिन में कहानियां सुनती है। व्रत के दौरान पति की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए व्रत करती है और रात को चांद उगने के बाद, पति का चेहरा देखने के बाद, पतिदेव को खाना खिलाने के बाद अपना व्रत खोलती है।

पति के लंबी उम्र कैसे होती है।

नारियां माता बहन बेटियां व्रत किसके लिए रखती है वह व्रत अपने पति के लिए रखती है पति की लंबी आयु स्वस्थ जीवन के लिए रखती हैं परंतु जब व्रत के दिन पति उनको कुछ लाकर ना दे फल वगरह आदि लाकर ना दे तब घर में क्लेश कर लेती है या घर में पति के पास उतने रुपए ना हो कि उसको कुछ लाकर दें। ऐसे में जो नारियां पति के साथ क्लेश करती है। जो पति का अपमान करती है, क्या उस वृत से पति की आयु लंबी हो सकती है। ऐसे व्रत का उल्टा प्रभाव पड़ता है। जो पत्नी अपने पति की मान मर्यादा इज्जत को नहीं समझती ऐसे में उनका व्रत करना ना करना बराबर है। पति की आयु लंबी तो तब होती है जब वह अपने पति की बात माने। और घर में सभी की इज्जत करें। जो नारियां पति की बात मानती नहीं और पति के लिए व्रत रखती है तो ऐसे में क्या पति की आयु लंबी हो सकती है? पति की आयु लंबी करने के लिए आप गृहस्थ नियम पर रहिए और अपने पतिदेव की बात माननें उनको सुखी रखें। जब उनको सुखी रखोगी तब उनकी आयु लंबी अपने आप हो जाएगी।

आपका व्रत सफल कब होगा।

पति का हर पल अपमान करते रहना और व्रत आने पर छलनी में चांद को देखकर खाना, खाना पति की इज्जत ना करना केवल पेट पूर्ति और छलनी में मुंह देखने से व्रत सफल नहीं होता है। आपका व्रत सफल तब होगा जब आपका पति आपसे खुश रहेगा। आप अपने पति को खुश रखोगी घर में प्रेम से रहना मिलकर हर कार्य करना सभी समस्याओं का समाधान बैठकर सुलझाना अपने पति की समस्या का समाधान करने में साथ देना। पतिदेव की इज्जत करना मान-सम्मान करना। जब इन कार्यों से आपके पति खुश होंगे तब निश्चित आपका व्रत सफल होगा।

करवा चौथ पर पति द्वारा उपहार

करवा चौथ पर उपहार

करवा चौथ पर जब महिलाएं माताएं बहन बेटियां व्रत रखती है तब उनके पति द्वारा उनको उपहार दिया जाता है। ऐसा जरूरी नहीं है परंतु वह अगर इच्छा रखते हैं तो दे सकते हैं ऐसे में कोई दिखावा नहीं करना जितनी आपकी चद्दर हो उतना पैर पसारो यानी जितना आपके पास खर्च हो खर्च करने इतने पैसे हो उससे ज्यादा खर्च मत करें। गृहस्थ जीवन, सुखी जीवन आपके दिखावे पर निर्भर नहीं करता बल्कि आपके प्रेम पर निर्भर करता है कि पति-पत्नी का आपस में कितना प्रेम है?

सकारात्मक अर्थ

हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं इसमें मनुष्य के नियम बताए गए हैं अच्छे और बुरे कि एक व्रत करने वाले को क्या नियम रखना चाहिए? चतुर नाम चतुराई का, आप चतुराई का नियम अपना लीजिए जिस पति-पत्नी का प्रेम सदा बना रहे। एक बात के दो अर्थ निकलते हैं इसलिए आप सकारात्मक अर्थ पकड़ लीजिए और नकारात्मक छोड़ दीजिए। इससे आप सदा सुखी रहेंगे और आगे बढ़ते जाएंगे।

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

धर्म: सनातन धर्म और हिंदू धर्म में क्या अंतर है आर्य और अनार्य कौन है?

सनातन धर्म

दुनिया का सबसे पावन और पवित्र धर्म जो है वह यही धर्म है आप सभी सनातन धर्म से संबंध रखते हैं प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो सनातन धर्म मां प्रकृति के नियम है। जिसको कोई नष्ट नहीं कर सकता। इसका कोई आदि और अंत नहीं है। इसको मिटाने वाला खुद मिट सकता है। जब तक मां प्रकृति है तब तक यह धर्म भी हैं और जो मां प्रकृति के नियम पर चलता है और उसकी पूजा करता है उसे प्रकृति अपने जैसा सर्वशक्तिमान बना लेती है और अपनी ताकत उस इंसान में भर देती है।

धर्म 

हिंदू धर्म 

हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं है यह भूल हुई है उन लोगों को जो अपने आप को हिंदू मानते हैं यह शब्दों को बोलने का फिर है जहां आज लोग बसे हुए हैं यहां कुछ नहीं केवल जंगल से भारत और इंसानों से खाली इलाका था हमारी प्राचीन सभ्यता जो सिंधु नदी के किनारे बसी हुई थी इसलिए सिंधु नदी के किनारे बसे होने के कारण उसे सिंधु सभ्यता कहते थे परंतु सिंधु नदी के उस पार के लोग, अफगानिस्तान की तरफ के लोगों को स शब्द का सही उच्चारण ना आने के कारण उसको ह बोलते थे।

 इसलिए सिंधु सभ्यता के लोगों को दूसरी तरफ के लोगों के मुख से हिंदू सभ्यता नाम निकलता था इसलिए धीरे-धीरे वहां की सभ्यता नष्ट हो गई किसी प्राकृतिक आपदा के कारण लोग इधर-उधर चले गए और लोगों ने हिंदू शब्द को पकड़ लिया और असलियत को भूल गए।

अपने मूल को भूल गए आज भी हम गांव में बहुत से पुराने लोगों से सुनते हैं वह स के उच्चारण को ह के उच्चारण में बोलते हैं। अपने अगर इतिहास पढ़ा है,अगर आपको कुछ इतिहास याद है तो उसमें भी हमारे प्राचीन सभ्यता के बारे में यह साफ लिखा हुआ है अब आप असलियत जान चुके हैं कि आप सब कौन हैं?

सनातन धर्म में आर्य और अनार्य कौन थे?

सनातन धर्म में भी दो तरह के लोग थे एक आर्य और दूसरे अनार्य।

आर्य जो अपने को आर्य मानते थे वह पूर्ण पवित्र थे आर्य परम ब्रह्म का रूप थे परम ब्रह्म वह होता है जो पूर्ण रूप से साफ स्वच्छ शुद्ध निर्मल रहते हो जिसका खान-पान शुद्ध होता है,रहन-सहन अच्छा होता है। इनमें तन के तीन दोष चोरी, जारी, हत्या। मन के तीन दोष ईर्ष्या, घमंड, मनसा पाप। जुबान के चार दोष कड़वा वचन, झूठ, चुगली और चापलूसी। यह सब दोष आर्यों में नहीं थे। उनकी जगह शांति, संतोष, दया, धर्म, कहनी करनी एक, कुल मर्यादा, गुरु मर्यादा इन सभी नियमों पर आर्य चलते थे। यह उनके परम गुण थे।

मां प्रकृति की पूजा करें 

आर्य किसकी पूजा करते थे? 

आर्य प्रत्यक्ष देवी देवता जिसमें जल, अग्नि, वायु, धरती, आकाश यानी पांच तत्वों की पूजा करते थे मा प्रकृति, सुर्य की पूजा किया करते थे और किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानते थे किसी भी भ्रमित बातों से दूर रहते थे।

अनार्यों के गुण

इनमें तन के तीन दोष- चोरी, जारी, हत्या। 

मन के तीन दोष- ईर्ष्या, घमंड, मनसा पाप। 

जुबान के चार दोष- कड़वा वचन, झूठ, चुगली और चापलूसी।

धन के दोष- जो लोग किसी की चोरी जारी हत्या करके झूठ बोलकर पैसे लाएगा उसका धन कैसा होगा? धन भी वैसा ही होगा जो व्यर्थ के कामों में लगेगा इसलिए यह लोग अपवित्र थे। जो धन अनुचित तरीके से कमाया हुआ होगा वह भी अपवित्र होगा। 

अनार्य किसकी पूजा करते थे?

यह मां प्रकृति की शक्ति को नहीं मानते थे यह अप्रत्यक्ष देवी देवताओं को मानते थे यह कल्पित मूर्तियों की पूजा करते थे। देवी देवता नाम देने का है। लेने का नहीं परंतु यह लोग इनको जीवों की बलि चढ़ाने में विश्वास करते थे यानी इनमें अंधविश्वास फैला हुआ था।

अब आप अपने आप से तुलना करके देखो कि आप कौन हो और क्या बने बैठे हो?

अपने आप की पहचान करो और जांच करके देखो अगर आप में आर्यों के गुण हैं तो आप आर्य हैं और अगर आप में अनार्यों के गुण है तो आप अनार्य हैं।

दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है? 

ऊपर बताई हुई बातों से आप समझ गए होंगे की सबसे पुराना धर्म कौन सा है?

मां प्रकृति का धर्म 

सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है क्योंकि जब से मां प्रकृति का निर्माण हुआ तब से उसके नियम बनें और उन नियमों को मनुष्य ने अपनाया और उन नियमों पर चलकर ही मनुष्य ने भक्ति की और अपने आप को विकसित किया।

आपको कौन सा धर्म अपनाना चाहिए?

मां प्रकृति सर्वशक्तिमान है और उसके नियम तब से हैं जब वह निर्मित हुई और उसके नियम तब तक ही रहेंगे जब तक मां प्रकृति है और मां प्रकृति को कोई नष्ट नहीं कर सकता यह तो खुद बनती है और खुद ही बिगड़ती है परंतु उसके नियम सदा रहेंगे मां प्रकृति सबकी मां है सबको जीवन देती है सबको रोटी, कपड़ा, मकान उसी से ही मिलता है। सनातन धर्म मनुष्य का बनाया हुआ नहीं बल्कि मा प्रकृति के नियम है। उसके बिना जीवन संभव नहीं है इसलिए आपको मां प्रकृति के नियमों पर रहकर सनातन धर्म अपनाना है।

दान करने के लिए जानें किस जगह पर किया आपका दान व्यर्थ नहीं जाता?

 प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो जब भी दान करने के बारे में सोचते हैं तो यह विचार अवश्य आता है कि हमें दान कहां पर करना चाहिए और किस जगह करना चाहिए ताकि आपका दान व्यर्थ न जाए आपके द्वारा किया हुआ दान सही जगह लग जाए। अगर कहीं पर बहुत बड़ी धन संपदा पड़ी हो और फिर भी वहां आप दान कर रहे हो तो ऐसा दान किसी काम नहीं आता दो आपको वहां करना चाहिए जहां पर किसी जीव को संतुष्टि मिले जब आपके द्वारा किए हुए भेदन से किसी जीव को संतुष्टि मिलती है तो उनका आपको बहुत बड़ा लाभ मिलता है वह आपका दान सफल हो जाता है ऐसा दान महा दान होता है। आज हम उन्हीं के बारे में आपको बताएंगे की कौन सी जगह आपको दान करना चाहिए?

गाय के लिए दान 

दान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता आप गाय को दान दीजिए गाय माता को दान किया हुआ आपको कभी व्यर्थ नहीं जाता सदा सफल होता है। यह ऐसे जियो हैं जो कभी भी इकट्ठा करके नहीं ले जाते यह जो भी आप डालोगे वह तुरंत खा लेंगे और जितना पेट में जाएगा उतना ही खाएंगे पेट भरने के बाद वह भी छोड़ दें। गाय हमारी माता के समान है जो निस्वार्थ भाव से अपने बच्चों की तरह ही हमें दूध देती है जिससे दही, लस्सी, पनीर बनता है और तरह-तरह की मिठाइयां बनती है। जिसके मूत्र से बहुत सी बीमारियां ठीक हो जाती है ऐसी गाय माता पूजनीय है और उसको किया हुआ दान सदा सफल होता है इसलिए आप गाय माता को को रोटी या चार जो भी आपके पास है आप दे सकते हैं।

गाय माता, गौमाता,गायपालन

पुत्र की तरह पालन करने वाली सब कुछ देने वाली गाय माता को कभी भी लात मत मारना 

बहुत बार हमने देखा है किसी को लात मारते हुए और डंडे से पीटते हुए ऐसा नहीं करना चाहिए आपके पास कुछ है तो उसके लिए दान कर दीजिएगा नहीं है तो उसको लात या डंडा मत मारिए।

बिना झोली का भिखारी कुत्ते को रोटी दान

अगला दान आप बिना झोली का फकीर कुत्ते को कर सकते हैं यह आप डालोगे तो खा लेगा वरना आपके पास से छिनकर नहीं ले जाएगा। यह ऐसा जीव है ना ही अपने घर ले जाकर इकट्ठा करेगा आप जो डालोगे वह तुरंत का लगा और उतना ही खायेगा जितना उसके पेट में आएगा इसलिए आप कुत्ते को रोटी या और कुछ खाने की चीज दे सकते हैं यह दान भी महादान है।

बिना झोली का फकीर कुत्ता

बिना झोली का भिखारी कुत्ते को कभी भी लात मत मारना 

कुत्ता बिना झोली का फकीर है। अपने मालिक के लिए वफादार है। कुत्ता मां लक्ष्मी का जीव है। जब किसी के घर में घटना होती है तो वह पहले बता भी देता है। परंतु हर कोई उसको समझ नहीं पाता और जब वह बोलकर बताता है तब लोग उसे लात या डंडा मारकर भगा देते हैं। इसलिए आप आगे से ध्यान रखें उसको कभी भी लात ना मारे क्योंकि लात मारने वाले को उसका कर्म का फल कुछ और ही मिलता है। ऐसी जीवो को लात मारने से या हाथों से मरने से परमात्मा उनके हाथ पैरों को छीन लेता है।

पक्षियों को छत पर दाना डालें और पानी रखें

पक्षियों को दाना डालना और उनके लिए गर्मी के दिनों में पानी रखना महादान है। पक्षियों को दाना डालने के लिए आप सुरक्षित जगह चुने और वहां रोजाना दाना और पानी डाल सकते हैं। कई बार ऐसी जगह पर दाना डाल देते हैं जिससे वहां पर बिल्ली आ जाती है और पक्षियों को खा जाते हैं इसलिए इस बात का ध्यान रखें आप जहां पर दाना डाल रहे हैं वहां पर बिल्ली ना पहुंचे। यह ऐसी जीव है जो आप डालोगे वहखा कर उड़ जाएंगे। कभी भी इकट्ठा करके साथ नहीं ले जाएंगे और ना ही अगले दिन के लिए इकट्ठा करेंगे एक दिन में जितना होगा खाकर उड़ जाएंगे और उसी दिन अपने बच्चों का पेट भर लेते हैं। जब बाहर घोंसला बना कर रहते हैं यह पक्षी कितना संकट झेलना पड़ता है इनको आंधी में तूफान में इसलिए इनको किया वरदान महादान है। इस पक्षियों के लिए आप अपने घर मेंघोसलों की जगह छोड़ सकते हैं। जब सुबह उठते हैं तब पक्षियों की ढाणी बड़ी मधुर लगती है सुबह-सुबह पक्षियों की चहचाहट मन में खुशियां भर देती है।

पक्षियों के लिए दान और पानी

चीटियों के लिए चुन डालें

चिट्टियां भी एक ऐसा जीव है जो कभी किसी का चुरा कर नहीं ले जाती जो आप आटा डालोगे वह खा लेगी उनके पेट में तो वैसे भी गांठ लगी होती है थोड़ा सा भी डाल दोगे तो बड़ी खुश हो जाएगी इसलिए इसलिए ऐसी जगह पर आटा डालें जहां पर वे पैरों के नीचे ना आए। और ध्यान रहे आप कहीं इधर-उधर जाते हो तो संभाल कर जाओ क्योंकि संसार में प्रत्येक जीव समान है एक चींटी भी आपके पैर के नीचे ना आ जाए अगर भूल वंश आ जाए तो कोई बात नहीं परंतु फिर भी आप इंसान हैं आपके अंदर इंसानियत के सारे गुण हैं। इसलिए इन जीवों को सदा बचा कर चलें।

चीटियों के लिए आटा

मछलियों के लिए दान

जल की रानी मछली के लिए आप आटे की गोलियां बनाकर पानी में डाल सकते हैं यह दान आपका महादान होता मछलियां कभी भी इकट्ठा करके नहीं रखती। आप जो डालोगे वह उसी से अपना पेट भर लगी।

मछली के लिए आटे की गोलियां

अनाथ आश्रम में दान

आजकल बहुत से अनाथ आश्रम चल रहे हैं महिला अनाथ आश्रम, पुरुष अनाथ आश्रम, विधवा अनाथ आश्रम, अनाथ बच्चों का आश्रम, वृद आश्रम यहां पर वह इंसान रहते हैं जिनका कोई नहीं होता इसलिए आप इनका सहारा बन सकते हैं यहां पर दान करना भी आपके लिए महादान होता यहां पर किया हुआ दान व्यर्थ नहीं जाएगा। यहां पर भी महिलाएं पुरुष बच्चे रहते हैं जो या तो घर से निकल गए हैं या किसी के द्वारा निकाल दिए गए हैं या अपनी मानसिक स्थिति के कारण पागलपन के कारण निकल गए हैं इसलिए आप आश्रम में दान कर सकते हैं। 

भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम

सतगुरु आश्रम में दान

आज बहुत से संत सतगुरु और परम संत होने का दावा कर रहे हैं परंतु ऐसा कुछ नहीं है सच्चा सतगुरु वह होता है जिसके अंदर परम शक्ति आकर बोलती हो जो आत्मज्ञान और अध्यात्म ज्ञान देता हो। जिसे गुरुकुल भी कहते हैं और वह सतगुरु निस्वार्थ भाव से सबको एक समान ज्ञान देता है और धन इकट्ठा नहीं करता सादे वेश में रहता है। सादा भोजन करता है यानी सादगी में रहता है। जो खुद रचना करने के बाद जीवो को शिक्षा देता हो और मां प्रकृति से जोड़ने की बात करते हो मां प्रकृति की रक्षा करने की बात करते हो, इसलिए आप परम संत जो गुरुकुल चल रहा हो वहां पर दान कीजिए। जहां पर हर महीने या रोजाना जीवो को पढ़ाने के लिए रूहानी कक्षा लगती हो। इस जगह पर किया हुआ दान आपका महादान है क्योंकि यहां पर बाहर से आने वाली संगत भोजन करते हैं जो आगे चलकर सतधर्म की रक्षा करेंगे।

पक्का सौदा आश्रम

प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो ऊपर बताए गए दान करने के लिए सभी उचित रास्ते हैं आप इनमें से किसी भी जगह दान कर सकते हैं आपका दान व्यर्थ नहीं जाएगा सदा सफल होगा और आपके मन को संतुष्टि मिलेगी। दान करने के बाद मन संतुष्ट जहां होता है! तब धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है वहां कभी भी धन की कमी नहीं आती। सब ओर से भंडारे भरे रहते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा उन पर सदैव बनी रहती है।

दिनचर्या क्या होती है? जानें क्यों है जरूरी और जीवन में कैसे लागू करें?

 दिनचर्या हमारे दैनिक कार्य होते हैं। जो कार्य हम सुबह से लेकर शाम तक रोजाना करते हैं। वह कौन सा कार्य किस समय करना है यह सब दिनचर्या के अंतर्गत आता है।

दिनचर्या - भारतवासी 

दिनचर्या अपनाने से क्या होता है?

सारे काम बिना दिनचर्या के भी हो सकते हैं परंतु वह कार्य जो दिनचर्या के बनाने के बाद होंगे ऐसे नहीं होते अगर आप अपनी दिनचर्या बनाकर काम करते हो तो उसमें मन एकाग्र रहेगा। बहुत से ऐसे काम होते हैं जो हमें करने होते हैं। दिनचर्या बनाने के बाद आदमी के मन में यह रहेगा कि यह काम मुझे इस समय करना है। और उसे समय वह मन को निर्देश दे देता है जिससे वह मन उसी समय जागरूक हो जाता है। जैसे अपने सोच लिया कि मुझे सुबह इतने बजे उठना है तो निश्चित है आपका शरीर उसे समय जागृत हो जाएगा उठाना या ना उठाना वह आप निर्भर है। दिनचर्या अपनाने के बाद जो काम आप पूरे दिन शायद ना कर पाओगे वह काम आप १ घंटे में कर सकते हो।

आपके लिए महत्वपूर्ण दिनचर्या 

  • उठना - हमारी दिनचर्या की शुरुआत जब हम उठते हैं तब होती है इसलिए उठने का कौन सा समय सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय धर्म संस्कृति में ब्रह्म मुहूर्त में उठने का नियम है इसलिए आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे इस समय उठने से आपके अंदर जो शक्ति आएगी वह दिन के किसी भी समय उठने में नहीं आएगी ब्रह्म मुहूर्त में उठने से आपका मन सख्त रहेगा और शरीर निर्मल होगा यानी आप जिस समय उठते हो वह समय आपके अंदर खुद की ऊर्जा भर देता है और उसी के अनुसार पूरा दिन चलता है जिस समय में आप उठते हो उसी की आपको ऊर्जा मिली क्योंकि आपने उठते ही किस समय का साथ किया? जिस समय का साथ किया वह समय आपके साथ हो जाता है और आपका दिन ऐसा बना देता है जैसा वह समय होता है इसलिए आपको ब्रह्म मुहूर्त में ३:०० बजे उठना है। अगर कुछ देरी भी हो जाए तो सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में जब आप उठते हो तो शरीर उठने के लिए मना करता है यानी नींद आती है। परंतु जब आप उठ जाते हो १०-१५ मिनट हो जाती है। तब आपका मन देखना कितना तंदुरुस्त आपको लगने लग जाएगा फिर नींद नहीं आएगी। अंदर से अलग ही खुशी जागेगी और वह खुशी पूरे दिन रहेगी। इस समय उठने से आपके अंदर पूरे दिन आलस नहीं आएगा और जब आलस नहीं आएगा तो आप हर कार्य को बहुत ही अच्छी तरीके से कर सकते हो यानी जब कोई कार्य रखेगा तब समय आपका साथ देगा।
  • शोच आदि से निवृत - इसके बाद आपको शोच आदि से निवृत होना है।
  • स्नान - उठने के बाद आपको स्नान करना है ब्रह्म मुहूर्त में किया हुआ स्नान जैसे आप पानी से नहीं अमृत से स्नान कर रहे हो और इस समय स्नान करने से आपके सारे रोग पानी से धूल जाते हैं। आपको उठने के बाद लगभग ३:१५ या ३:३० बजे स्नान करना चाहिए।
  • ध्यान, पढ़ाई - स्नान के बाद आपको ध्यान लगाना है ध्यान लगाने से आप अमृत का पान कर सकते हो एक ऐसा ध्यान जिससे आपका उठने का मन ही नहीं करेगा कि बस में तो ऐसे ही बैठा रहूं, ध्यान मग्न जब आप ध्यान लगाओगे तब आपका मन एकदम शांत हो जाएगा और आप जिस समय ध्यान लगाओगे वैसे मैं आपके अंदर उर्जा भरनी शुरू कर देगा इस समय की ऊर्जा आपके अंदर आनी शुरू हो जाएगी और वह समय आपको ब्रह्मांड के बारे में बताना शुरू कर देगा ध्यान में जो आनंद मिलता है वह ध्यान लगाने वाला ही जानता है। जिसको अमृत का पान करना है वह सुबह 4:00 बजे से पहले उठकर ध्यान लगा सकता है। ध्यान लगाने से आपका शरीर सोने की तरह चमकने लग जाएगा। जो विद्यार्थी हैं वह सुबह इस समय उठकर पढ़ सकते हैं सुबह अपनी तैयारी कर सकते हैं। यह समय सबसे शांत होता है और शांत माहौल में पढ़ाई सबसे बढ़िया होती है इसलिए सबसे उचित समय यही है पढ़ाई करने का जब भी आपको बहुत आगे जाना हो तब आप इस समय पढ़ाई कीजिए।
  • माता-पिता को प्रणाम - यह कार्य पूर्ण करने के बाद तब तक आपके माता-पिता भी उठ जाएंगे उस समय आपको माता-पिता को प्रणाम करना है। जब माता-पिता का आशीर्वाद मिल जाता है फिर आप अपने रास्ते से भटकोगे नहीं, सदा अपने माता-पिता के अनुकूल समाज के अनुकूल और प्रकृति के अनुकूल कार्य करते चलोगे जिससे प्रकृति भी आपका साथ देगी।
  • सुबह 7:00 बजे भोजन - लगभग सुबह 7:00 बजे आपको भोजन कर लेना है क्योंकि इस समय जब सूर्योदय उदय होता है तब जठराग्नी तेज होती है। इस समय किया हुआ कठोर से कठोर भोजन भी पच जाता है। सबसे पहले भोजन को नमस्कार करना है। उरमा प्रकृति को धन्यवाद देना है कि हे मां प्रकृति इस संसार में कोई भूखा ना रहे सब पर तेरा आशीर्वाद बना रहे और फिर भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण करना है। भोजन को धीरे-धीरे एक टक को ३२ बार चबाकर खाना है। ऐसा करने से आपके अंदर ऊर्जा ज्यादा बढ़ेगी और शरीर में मल कम बनेगा। और ३२ बार चबाने से आपके आंतों को जोर नहीं लगाना पड़ेगा यानी आंतों का काम सर आप दांतों से कर दीजिए। जब आप भजन धीरे-धीरे करोगे तब आपको पूर्ण भोजन यानी पूरा पेट भरने के बाद हड़कार आ जाएगी। उसे समय प्रकृति अंदर से आवाज देगी कि आपका पेट भर गया है अब मत खाइए तब आप इस समय खड़े हो जाइए उससे ज्यादा मत खाइए क्योंकि प्रकृति ने अंदर से आवाज दी है उसे आवाज को आप जान लें कि आपका पेट पूर्ण भर गया है और ना ही उससे कम खाएं। अगर आप हडकार आने से पहले ही उठ जाते हैं या पूर्ण पेट भरने से पहले उठ जाते हैं तब निश्चित है आप पतले होने शुरू हो जाएंगे और अगर आपने हडकार आने के बाद तक खाते रहे तो निश्चित है आपको मोटापा आ जाएगा। इसलिए भोजन न ही इतना कम खाएं कि आप लकड़ी की तरह सूख जाए और ना ही इतना ज्यादा खाएं कि आपसे चला भी ना जाए। 
  • विद्यालय, कंपनी में नौकरी, खुद का काम - भोजन करने के तुरंत बाद आप काम लग जाइए यानी जो विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं वह स्कूल में जाए या घर में बैठकर पढ़ें और जो बाहर कंपनी में काम करते हैं। नौकरी करते हैं वह नौकरी के लिए जा सकते हैं और जो खुद का बिजनेस करते हैं वह खुद का काम कर सकते हैं। इस समय आप पूरा समय अपने पढ़ाई करने में, नौकरी करने वाले कंपनी में और खुद का काम करने वाले खुद का काम करने में बिना आलस के समय दे पाएंगे।

आपकी दिनचर्या - उठना, स्नान, ध्यान, भोजन, पढ़ाई, कार्य, सोना।

  • खेलना - विद्यार्थी स्कूल से आने के बाद और कर्मचारी कंपनी से आने के बाद वह अपना समय कुछ खेलने में भी दे सकते हैं वह आपकी दिनचर्या पर निर्भर करता है क्योंकि खेल प्रेम बढ़ता है और एक दूसरे का पता चलता है खेल में मिलनसार व्यक्ति तो बनता है खेल भी सीखाता है कि हमें किस कार्य को किस तरीके से करना है? किस व्यक्ति को किस प्रकार का में लेना है? इसमें विद्यार्थी स्तरपर बहुत गुण सीखने को मिलते हैं जो की अनमोल गुण होते हैं। खेल खेलने से हम पूरे दिन में जो तनाव मिलता है? जब वह खेल में लगाते हैं तो सारा कुछ भूल जाते हैं और भूलने के बाद तनाव मुक्त हो जाते हैं जिससे खुशी मिलती है और शरीर निरोग होता है।
  • शाम ७:०० बजे से पहले भोजन - खेल खेलने के बाद आप कुछ घर के कामों में सहयोग करवा सकते हो और अगर आपके पूरे दिन काम करने से पसीना आया है तो आप स्नान कर सकते हो अगर स्नान की आवश्यकता नहीं है तो आप हाथ पैर मुंह धो कर ७:०० से पहले भोजन करना है क्योंकि जब आप ७:०० से पहले भोजन कर लेते हो तब आपको दूसरे दिन सुबह जल्दी उठने में परेशानी नहीं होगी और आपकी नींद पूरी रात में पूर्ण हो जाएगी और जिस समय आप उठाना चाहते हो सुबह उसी समय आपकी आंखें खुल जाएगी। श्याम सूर्यास्त के साथ भोजन करना उचित है यानी ७:०० के लगभग क्योंकि रात्रि को भोजन करना अनुचित है इसके कई कारण हैं क्योंकि जब हम दिन से भोजन कर लेते हैं तब देख पाते हैं कि भोजन पूर्णतया साफ है रात को भोजन में कुछ गिर जाए तो पता नहीं चलेगा कि क्या गिरा है। इसलिए आप शाम को जल्दी भोजन कर लीजिए 
  • सभी इकट्ठे बैठकर बातचीत - शाम का भोजन करने के बाद आप सब इकट्ठे बैठ जाएं इकट्ठे बैठकर पूरे दिन के कामों के बारे में बातचीत करें घर की योजना के बारे में बातचीत करें घर का आगे बढ़ाने के बारे में बातचीत करें और परिवार को जो आगे काम करना है उसकी योजना बनाएं सब मिलकर बैठने से परिवार में एकता बढ़ती है समाज का सबसे मजबूत आधार संयुक्त परिवार हैं इसलिए आप संयुक्त परिवार में रहे संयुक्त परिवार एक बन्धी बुहारी, झाड़ू की तरह होता है। जो इकट्ठी रहती है तो घर का कचरा साफ कर देती है और जब झाड़ू बिखर जाती है तो खुद कचरा बन जाती है। इसलिए बिहारी से सीख लेकर संयुक्त परिवार में नहीं रहिए।
  • अगले दिन के कार्यों की सूची - परिवार से बातचीत के बाद आप अपने सोने वाले कमरे में चले जाइए और वहां एकांत में बैठकर आप अपने अगले दिन के कार्यों की सूची तैयार कीजिए की आपको कल क्या करना है? और आज क्या किया और क्या करना चाहिए था इसके बारे में विचार कीजिए इससे आपको अपने कार्यों में सम्मनवय लाना और एक संतुलित जीवन जीना सीख जाओगे। और हर कार्य को समय पर कर पाओगे।
  • सोना - अगले कार्यों की सूची बनाने के बाद आपके शरीर को आराम देने के लिए सोना है जब आप जल्दी सो गई तो जल्दी उठोगे और एक अच्छी दिनचर्या के लिए अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए समय पर सोना जरूरी है स्वास्थ्य के लिए नींद बहुत महत्वपूर्ण है आराम देना बहुत जरूरी है इस समय जिस प्रकार बिजली के कारण बैटरी चार्ज होती है। उसी प्रकार हमारे सोने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है जो कि हम दैनिक कार्य करते हैं उनमें खर्च होती है। जैसे हम दिन में काम करते हैं उनमें ऊर्जा खर्च होती है पशुओं की घूमने फिरने चढ़ाने से ऊर्जा खर्च होती है पक्षियों की उड़ने से खाने पीने से सब की ऊर्जा खर्च होती है। इसलिए समय पर सोएं और समय पर उठें अपनी नींद पूरी करें।
  • रविवार या छुट्टी के दिन - यह सब कार्य आपके प्रतिदिन के हैं परंतु रविवार को आपकी छुट्टी रहती है बाकी ७ दिनों में आप विधालय में, कार्यालय में जाते हैं लेकिन रविवार आपके लिए विशेष है इस दिन आप अपना नया काम कर सकते हैं जो ७ दिन करते हैं उनसे अलग काम कर सकते हैं शाम सुबह की दिनचर्या सामान रखिए और दिन में आप कुछ नया काम कीजिए जिसे जिंदगी में बदलाव आए क्योंकि बदलाव तरक्की है। रोजाना काम करते हैं वह करते हैं और जिंदगी में नई कुशलता सीखने के लिए और कुशलता वह चीज है जो आपको आत्मनिर्भर बनाएगी इसलिए इस दिन आप एक आत्मनिर्भर बनने वाला काम कीजिए। इस दिन किया हुआ आत्मनिर्भर का काम आपको पूरी जिंदगी काम देगा। यह दिनचर्या अपनाने के बाद आप एक सामान्य आदमी से विशेष इंसान बन जाओगे।
  • इसी के साथ-साथ आप खुश रहें। मौज में रहे। आपके घर खुशियों के दीप जले और सदा तरक्की करते जाएं।

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आज के समय जन्मदिन एक त्यौहार की तरह हो गया है आज हर कोई चाहता है कि मेरा जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाए। आज एक दूसरे की देखा देखी में सोच ...

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