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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

दिनचर्या क्या होती है? जानें क्यों है जरूरी और जीवन में कैसे लागू करें?

 दिनचर्या हमारे दैनिक कार्य होते हैं। जो कार्य हम सुबह से लेकर शाम तक रोजाना करते हैं। वह कौन सा कार्य किस समय करना है यह सब दिनचर्या के अंतर्गत आता है।

दिनचर्या - भारतवासी 

दिनचर्या अपनाने से क्या होता है?

सारे काम बिना दिनचर्या के भी हो सकते हैं परंतु वह कार्य जो दिनचर्या के बनाने के बाद होंगे ऐसे नहीं होते अगर आप अपनी दिनचर्या बनाकर काम करते हो तो उसमें मन एकाग्र रहेगा। बहुत से ऐसे काम होते हैं जो हमें करने होते हैं। दिनचर्या बनाने के बाद आदमी के मन में यह रहेगा कि यह काम मुझे इस समय करना है। और उसे समय वह मन को निर्देश दे देता है जिससे वह मन उसी समय जागरूक हो जाता है। जैसे अपने सोच लिया कि मुझे सुबह इतने बजे उठना है तो निश्चित है आपका शरीर उसे समय जागृत हो जाएगा उठाना या ना उठाना वह आप निर्भर है। दिनचर्या अपनाने के बाद जो काम आप पूरे दिन शायद ना कर पाओगे वह काम आप १ घंटे में कर सकते हो।

आपके लिए महत्वपूर्ण दिनचर्या 

  • उठना - हमारी दिनचर्या की शुरुआत जब हम उठते हैं तब होती है इसलिए उठने का कौन सा समय सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय धर्म संस्कृति में ब्रह्म मुहूर्त में उठने का नियम है इसलिए आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे इस समय उठने से आपके अंदर जो शक्ति आएगी वह दिन के किसी भी समय उठने में नहीं आएगी ब्रह्म मुहूर्त में उठने से आपका मन सख्त रहेगा और शरीर निर्मल होगा यानी आप जिस समय उठते हो वह समय आपके अंदर खुद की ऊर्जा भर देता है और उसी के अनुसार पूरा दिन चलता है जिस समय में आप उठते हो उसी की आपको ऊर्जा मिली क्योंकि आपने उठते ही किस समय का साथ किया? जिस समय का साथ किया वह समय आपके साथ हो जाता है और आपका दिन ऐसा बना देता है जैसा वह समय होता है इसलिए आपको ब्रह्म मुहूर्त में ३:०० बजे उठना है। अगर कुछ देरी भी हो जाए तो सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में जब आप उठते हो तो शरीर उठने के लिए मना करता है यानी नींद आती है। परंतु जब आप उठ जाते हो १०-१५ मिनट हो जाती है। तब आपका मन देखना कितना तंदुरुस्त आपको लगने लग जाएगा फिर नींद नहीं आएगी। अंदर से अलग ही खुशी जागेगी और वह खुशी पूरे दिन रहेगी। इस समय उठने से आपके अंदर पूरे दिन आलस नहीं आएगा और जब आलस नहीं आएगा तो आप हर कार्य को बहुत ही अच्छी तरीके से कर सकते हो यानी जब कोई कार्य रखेगा तब समय आपका साथ देगा।
  • शोच आदि से निवृत - इसके बाद आपको शोच आदि से निवृत होना है।
  • स्नान - उठने के बाद आपको स्नान करना है ब्रह्म मुहूर्त में किया हुआ स्नान जैसे आप पानी से नहीं अमृत से स्नान कर रहे हो और इस समय स्नान करने से आपके सारे रोग पानी से धूल जाते हैं। आपको उठने के बाद लगभग ३:१५ या ३:३० बजे स्नान करना चाहिए।
  • ध्यान, पढ़ाई - स्नान के बाद आपको ध्यान लगाना है ध्यान लगाने से आप अमृत का पान कर सकते हो एक ऐसा ध्यान जिससे आपका उठने का मन ही नहीं करेगा कि बस में तो ऐसे ही बैठा रहूं, ध्यान मग्न जब आप ध्यान लगाओगे तब आपका मन एकदम शांत हो जाएगा और आप जिस समय ध्यान लगाओगे वैसे मैं आपके अंदर उर्जा भरनी शुरू कर देगा इस समय की ऊर्जा आपके अंदर आनी शुरू हो जाएगी और वह समय आपको ब्रह्मांड के बारे में बताना शुरू कर देगा ध्यान में जो आनंद मिलता है वह ध्यान लगाने वाला ही जानता है। जिसको अमृत का पान करना है वह सुबह 4:00 बजे से पहले उठकर ध्यान लगा सकता है। ध्यान लगाने से आपका शरीर सोने की तरह चमकने लग जाएगा। जो विद्यार्थी हैं वह सुबह इस समय उठकर पढ़ सकते हैं सुबह अपनी तैयारी कर सकते हैं। यह समय सबसे शांत होता है और शांत माहौल में पढ़ाई सबसे बढ़िया होती है इसलिए सबसे उचित समय यही है पढ़ाई करने का जब भी आपको बहुत आगे जाना हो तब आप इस समय पढ़ाई कीजिए।
  • माता-पिता को प्रणाम - यह कार्य पूर्ण करने के बाद तब तक आपके माता-पिता भी उठ जाएंगे उस समय आपको माता-पिता को प्रणाम करना है। जब माता-पिता का आशीर्वाद मिल जाता है फिर आप अपने रास्ते से भटकोगे नहीं, सदा अपने माता-पिता के अनुकूल समाज के अनुकूल और प्रकृति के अनुकूल कार्य करते चलोगे जिससे प्रकृति भी आपका साथ देगी।
  • सुबह 7:00 बजे भोजन - लगभग सुबह 7:00 बजे आपको भोजन कर लेना है क्योंकि इस समय जब सूर्योदय उदय होता है तब जठराग्नी तेज होती है। इस समय किया हुआ कठोर से कठोर भोजन भी पच जाता है। सबसे पहले भोजन को नमस्कार करना है। उरमा प्रकृति को धन्यवाद देना है कि हे मां प्रकृति इस संसार में कोई भूखा ना रहे सब पर तेरा आशीर्वाद बना रहे और फिर भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण करना है। भोजन को धीरे-धीरे एक टक को ३२ बार चबाकर खाना है। ऐसा करने से आपके अंदर ऊर्जा ज्यादा बढ़ेगी और शरीर में मल कम बनेगा। और ३२ बार चबाने से आपके आंतों को जोर नहीं लगाना पड़ेगा यानी आंतों का काम सर आप दांतों से कर दीजिए। जब आप भजन धीरे-धीरे करोगे तब आपको पूर्ण भोजन यानी पूरा पेट भरने के बाद हड़कार आ जाएगी। उसे समय प्रकृति अंदर से आवाज देगी कि आपका पेट भर गया है अब मत खाइए तब आप इस समय खड़े हो जाइए उससे ज्यादा मत खाइए क्योंकि प्रकृति ने अंदर से आवाज दी है उसे आवाज को आप जान लें कि आपका पेट पूर्ण भर गया है और ना ही उससे कम खाएं। अगर आप हडकार आने से पहले ही उठ जाते हैं या पूर्ण पेट भरने से पहले उठ जाते हैं तब निश्चित है आप पतले होने शुरू हो जाएंगे और अगर आपने हडकार आने के बाद तक खाते रहे तो निश्चित है आपको मोटापा आ जाएगा। इसलिए भोजन न ही इतना कम खाएं कि आप लकड़ी की तरह सूख जाए और ना ही इतना ज्यादा खाएं कि आपसे चला भी ना जाए। 
  • विद्यालय, कंपनी में नौकरी, खुद का काम - भोजन करने के तुरंत बाद आप काम लग जाइए यानी जो विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं वह स्कूल में जाए या घर में बैठकर पढ़ें और जो बाहर कंपनी में काम करते हैं। नौकरी करते हैं वह नौकरी के लिए जा सकते हैं और जो खुद का बिजनेस करते हैं वह खुद का काम कर सकते हैं। इस समय आप पूरा समय अपने पढ़ाई करने में, नौकरी करने वाले कंपनी में और खुद का काम करने वाले खुद का काम करने में बिना आलस के समय दे पाएंगे।

आपकी दिनचर्या - उठना, स्नान, ध्यान, भोजन, पढ़ाई, कार्य, सोना।

  • खेलना - विद्यार्थी स्कूल से आने के बाद और कर्मचारी कंपनी से आने के बाद वह अपना समय कुछ खेलने में भी दे सकते हैं वह आपकी दिनचर्या पर निर्भर करता है क्योंकि खेल प्रेम बढ़ता है और एक दूसरे का पता चलता है खेल में मिलनसार व्यक्ति तो बनता है खेल भी सीखाता है कि हमें किस कार्य को किस तरीके से करना है? किस व्यक्ति को किस प्रकार का में लेना है? इसमें विद्यार्थी स्तरपर बहुत गुण सीखने को मिलते हैं जो की अनमोल गुण होते हैं। खेल खेलने से हम पूरे दिन में जो तनाव मिलता है? जब वह खेल में लगाते हैं तो सारा कुछ भूल जाते हैं और भूलने के बाद तनाव मुक्त हो जाते हैं जिससे खुशी मिलती है और शरीर निरोग होता है।
  • शाम ७:०० बजे से पहले भोजन - खेल खेलने के बाद आप कुछ घर के कामों में सहयोग करवा सकते हो और अगर आपके पूरे दिन काम करने से पसीना आया है तो आप स्नान कर सकते हो अगर स्नान की आवश्यकता नहीं है तो आप हाथ पैर मुंह धो कर ७:०० से पहले भोजन करना है क्योंकि जब आप ७:०० से पहले भोजन कर लेते हो तब आपको दूसरे दिन सुबह जल्दी उठने में परेशानी नहीं होगी और आपकी नींद पूरी रात में पूर्ण हो जाएगी और जिस समय आप उठाना चाहते हो सुबह उसी समय आपकी आंखें खुल जाएगी। श्याम सूर्यास्त के साथ भोजन करना उचित है यानी ७:०० के लगभग क्योंकि रात्रि को भोजन करना अनुचित है इसके कई कारण हैं क्योंकि जब हम दिन से भोजन कर लेते हैं तब देख पाते हैं कि भोजन पूर्णतया साफ है रात को भोजन में कुछ गिर जाए तो पता नहीं चलेगा कि क्या गिरा है। इसलिए आप शाम को जल्दी भोजन कर लीजिए 
  • सभी इकट्ठे बैठकर बातचीत - शाम का भोजन करने के बाद आप सब इकट्ठे बैठ जाएं इकट्ठे बैठकर पूरे दिन के कामों के बारे में बातचीत करें घर की योजना के बारे में बातचीत करें घर का आगे बढ़ाने के बारे में बातचीत करें और परिवार को जो आगे काम करना है उसकी योजना बनाएं सब मिलकर बैठने से परिवार में एकता बढ़ती है समाज का सबसे मजबूत आधार संयुक्त परिवार हैं इसलिए आप संयुक्त परिवार में रहे संयुक्त परिवार एक बन्धी बुहारी, झाड़ू की तरह होता है। जो इकट्ठी रहती है तो घर का कचरा साफ कर देती है और जब झाड़ू बिखर जाती है तो खुद कचरा बन जाती है। इसलिए बिहारी से सीख लेकर संयुक्त परिवार में नहीं रहिए।
  • अगले दिन के कार्यों की सूची - परिवार से बातचीत के बाद आप अपने सोने वाले कमरे में चले जाइए और वहां एकांत में बैठकर आप अपने अगले दिन के कार्यों की सूची तैयार कीजिए की आपको कल क्या करना है? और आज क्या किया और क्या करना चाहिए था इसके बारे में विचार कीजिए इससे आपको अपने कार्यों में सम्मनवय लाना और एक संतुलित जीवन जीना सीख जाओगे। और हर कार्य को समय पर कर पाओगे।
  • सोना - अगले कार्यों की सूची बनाने के बाद आपके शरीर को आराम देने के लिए सोना है जब आप जल्दी सो गई तो जल्दी उठोगे और एक अच्छी दिनचर्या के लिए अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए समय पर सोना जरूरी है स्वास्थ्य के लिए नींद बहुत महत्वपूर्ण है आराम देना बहुत जरूरी है इस समय जिस प्रकार बिजली के कारण बैटरी चार्ज होती है। उसी प्रकार हमारे सोने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है जो कि हम दैनिक कार्य करते हैं उनमें खर्च होती है। जैसे हम दिन में काम करते हैं उनमें ऊर्जा खर्च होती है पशुओं की घूमने फिरने चढ़ाने से ऊर्जा खर्च होती है पक्षियों की उड़ने से खाने पीने से सब की ऊर्जा खर्च होती है। इसलिए समय पर सोएं और समय पर उठें अपनी नींद पूरी करें।
  • रविवार या छुट्टी के दिन - यह सब कार्य आपके प्रतिदिन के हैं परंतु रविवार को आपकी छुट्टी रहती है बाकी ७ दिनों में आप विधालय में, कार्यालय में जाते हैं लेकिन रविवार आपके लिए विशेष है इस दिन आप अपना नया काम कर सकते हैं जो ७ दिन करते हैं उनसे अलग काम कर सकते हैं शाम सुबह की दिनचर्या सामान रखिए और दिन में आप कुछ नया काम कीजिए जिसे जिंदगी में बदलाव आए क्योंकि बदलाव तरक्की है। रोजाना काम करते हैं वह करते हैं और जिंदगी में नई कुशलता सीखने के लिए और कुशलता वह चीज है जो आपको आत्मनिर्भर बनाएगी इसलिए इस दिन आप एक आत्मनिर्भर बनने वाला काम कीजिए। इस दिन किया हुआ आत्मनिर्भर का काम आपको पूरी जिंदगी काम देगा। यह दिनचर्या अपनाने के बाद आप एक सामान्य आदमी से विशेष इंसान बन जाओगे।
  • इसी के साथ-साथ आप खुश रहें। मौज में रहे। आपके घर खुशियों के दीप जले और सदा तरक्की करते जाएं।

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