अंधविश्वास से दूर रहो और जानें असली सच्चाई आज समाज में अंधविश्वास बहुत फैला हुआ है लोग अंधविश्वास में क्यों पड़ रहे हैं किसी ने किसी की बात सुनी और सुनते ही अपना लेते हैं परंतु खोज करके नहीं देखते की सच्चाई क्या है?
जिसन जो बात कही वह झूठ या मिथ्या भी हो सकती है इसलिए जब भी कोई चीज या बात आपके लिए नहीं हो उसकी पूरी जांच पड़ताल करके देखो सत्य पाया जाए तो मानो वरना मत मानो अगर आपको कुछ शंका लगे तो किसी विद्वान के पास जाकर पता करें बात कितनी भी सत्य क्यों ना हो लेकिन खुद की खोज के बिना घोर अंधेरा है इसलिए खोज करके अवश्य देखें।
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| व्रत में खटाई |
व्रत में खटाई का क्या अर्थ है?
व्रत में खटाई का अर्थ मां अशुद्ध पवित्र हो जाना जब व्रत करते हैं तब पढ़ लेते हैं कि जब तक व्रत पूरा ना हो जाए तब तक वह बुरे विचार ना आ जाए या किसी के बारे में गलत विचार भावना ना आना या किसी को अब शब्द बोलना मिले वस्त्र पहनना मन में बुरे विचार लाना कपट की भावना रखता व्रत में खटाई का यही अर्थ है
लोगों की सोच और अंधविश्वास
प्रिय ज्ञानी सतपुरषो लोगों का मानना है कि जब व्रत करते हैं तब नींबू, इमली, कैरी, कढ़ी, लस्सी, दही, संतरा आदि नहीं खाना चाहिए लेकिन वह भूल में है की असलियत में कौन सी खटाई इंसान को नहीं खानी चाहिए जिससे व्रत खंडित होता है या अधूरा रह जाता है।
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| व्रत में दही ,लस्सी, संतरा खा सकते हैं, लेकिन बुरे नियम की खटाई ना लें |
कौन सी खटाई व्रत में नहीं खानी चाहिए?
यह खटाई इंसान के बुरे नियमों की खटाई होती है कपट की खटाई, चोरी, जारी, हत्या, करवा वचन, झूठ, चुगली, चापलूसी जैसी खटाई इंसान को नहीं खानी चाहिए जो इंसान इन सब से सदा दूर रहता है उसका तो हर समय व्रत ही होता है।
व्रत में खटाई क्यों नहीं खानी चाहिए?
व्रत में खटाई का अर्थ प्रकृति में पैदा हुई खट्टी चीज खाना खटाई में नहीं आता बल्कि यह कपट चोरी, जारी, हत्या, करवा वचन, झूठ की खटाई है जो इंसान को नहीं अपनानी व्रत में यह खटाई इसलिए नहीं खाई जानी चाहिए क्योंकि जब व्रत करते हैं तब उसका लक्ष्य होता है कि वह कुछ नया पाए यह जीवन को बदले अगर मनुष्य इन्हीं विचारों में रहेगा तो वह आगे नहीं पढ़ पाएगा इसलिए व्रत एक दर्द संकल्प होता है जो बहुत जल्दी बदलाव कर सकता है पहले ऋषि मुनियों ने व्रत के माध्यम से ही बहुत-बहुत बड़े काम किए हैं। देवी देवताओं को खुश कर बड़ी-बड़ी सिद्धियां प्राप्त की,बहुत से नए-नए आविष्कार किए और ऐसे आविष्कार किया जींचे प्रकृति को कोई भी ठेस नहीं पहुंचती।
अगर व्रत में खटाई खा लेते हैं तो क्या होता है?
अगर आपने व्रत में जो आप समझ रहे हैं वह खटाई लस्सी, दही, टमाटर, कैरी आदि खा लेते हैं तो यह तो प्रकृति का भोजन है शाकाहारी भोजन है यह खा लेते हैं तो अच्छी बात है परंतु आपको बुराइयों की खटाई नहीं खानी कपट की खटाई, झूठ, चुगली, चापलूसी की खटाई नहीं खानी इन सब से आपको बचकर रहना है यह खटाई नहीं खाओगे तो आपका व्रत सफल रहेगा।


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