भारतीय सनातन धर्म संस्कृति में दिवाली का बहुत महत्व है विजयदशमी के दिन राम ने रावण को मारा और फिर दीपावली के दिन अमावस्या को अयोध्या वापस लौटे थे तब उनके आने की खुशी में सभी के घरों में खुशी के दीपक जलाए गए।
शब्दार्थ
दीप का अर्थ दीपक और अवली का अर्थ कतार। प्रत्येक घर पर दीयों की लंबी कतार लगाई गई। दीयों की इस लंबी कतार को दीपावली कहते हैं। रावण को मार कर सीता को साथ लेकर राम घर लौटे इससे राम के आने की खुशी में दीए जलाए गए तब से लगातार यह त्यौहार हर साल मनाया जाने लगा।
घरों की सफाई
दिवाली के कुछ दिन पहले ही घरों को सुंदर-सुंदर सजाने लग जाते हैं रंग रोगन मकान की साफ सफाई की जाती है।
धनतेरस यह दिन कृष्ण पक्ष के तेरस के दिन और दीपावली के दो दिन पहले मनाया जाता है यह दिन धन से संबंध रखता है इसलिए इस धनतेरस कहा गया इस दिन चांदी खरीदने का महत्व रखते हैं जो मन से जुड़ी होती है जिससे धन में बढ़ोतरी होती है।
छोटी दिवाली
चौदस के दिन को छोटी दिवाली के रूप में मनाते हैं जो धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली के 1 दिन पहले होती है इस दिन घर दरवाजे पर एक दीपक जलाया जाता है इस दिन को नरक चौदस भी कहते हैं।
दीपावली
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| प्रकाश के महापर्व दीपावली पर आप सभी पर मां लक्ष्मी की रहमत बरसती रहे। |
इस दिन शाम के समय में लक्ष्मी की पूजा की जाती है सभी घरों में लक्ष्मी की ज्योत जलाई जाती है यह देवी हमारे हृदय कमल में विराजमान है इसके दो रूप हैं दूसरा रूप सावित्री का है।
अंधेरे में उजाला
इस रात चांद दिखाई नहीं देता इसलिए अमावस्या के कारण बहुत अंधेरा रहता है और जब सभी घरों, दुकानों में दीए जलाए जाते हैं रोशनी की जाती है तब सारा देश रोशनी से जगमगा उठता है और वह अंधेरे में जगने वाली रोशनी अंधेरे को दूर कर रोशनी ही रोशनी हो जाती है जब सब लोग घरों को सजाते हैं। सब अपनी-अपने घरों में रोशनी लगते हैं तब उस समय का माहौल बहुत मनमोहक लगता है।
जिस प्रकार अमावस्या के दिन दीए जलने से प्रकाश से अंधेरा दूर होता है इसी प्रकार सभी अपने अंदर की जोत जलाएं ताकि आपका मन रूपी अंधेरा भी दूर हो जाएं।
घरों में अनेक प्रकार के भोजन
घरों में अनेक प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं हलवा, खीर, पुडी़, पूडा़, गुलगुला सुहाली, सीरा, मालपुडा़
मिठाइयां
खील गुजरी, लड्डू, बूंदी, जलेबी, चक्की, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, चम-चम, काजू कतली, ग्वार पेठा, बर्फी।
घर से बाहर रहने वाले लोग नौकरी करने वाले या परिवार से दूर रहने वाले लोग इस दिन घर आते हैं वह पूरी साल कमाते रहते हैं लेकिन उनके लिए घर में आने का यह बहुत ही शुभ अवसर है।
अंधविश्वासों से दूर रहे
इस दिन समाज में ऐसे भी कार्य होते हैं जो मनुष्य को अंधविश्वासों की ओर ले जाते हैं इस दिन टोना टोटका तंत्र-तांत्रिकों से दूर रहकर आपका हृदय में बैठी मां लक्ष्मी की पूजा करें अंधविश्वासों से दूर रहकर सच्चे हृदय से मन प्रकृति के नियमों पर रहकर सबसे प्रेम करें और खुशियों के साथ दीपावली का त्योंहार मनाएं।
दीपावली के दिन प्रदूषण ना फैलाएं
खुशी के मौके पर पटाखा बम चकरी फुलझड़ी सामान्य सी बात है लेकिन यह सब प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। वायु प्रदूषण करने से बचें क्योंकि प्रकृति को मैं नहीं हम सब मिलकर बचा सकते हैं और जहां हम रहते हैं उस वातावरण को हम शुद्ध नहीं रखेंगे तो कौन शुद्ध रखेगा? अगर हम शुद्ध नहीं रखेंगे तो आने वाले समय में संकटों का सामना हमें ही करना पड़ सकता है इसलिए संकट आए ना उससे पहले ही हम समाधान कर लें।
गोवर्धन
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| गोवर्धन की शुभकामनाएं |
गोवर्धन के दिन इस दिन सुबह 4:00 उठकर सभी माता बहने रात को बिखरा हुआ पटाखा आदि का कूड़ा पूरे आंगन से साफ करके सभी जगह से कूड़ा उठाकर एक पोटली बांध लें और जौहर के किनारे डाल आए और कह दे की हे दालद महराज अब 1 साल तक हमारे घर मत आना, हे घर की बुराई हमारे घर 1 साल तक मत आना, जिसे आपका घर सदा आगे बढ़ता जाएगा धन-धान्य रहेगा और किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहेगी।
इसके बाद गाय का गोबर लेकर घर के आगे मुख्य द्वार पर गोवर्धन पूजा करते हैं दीया जलाते हैं बाजरी की सिटी, काचर, बेर, मिठाई, खील गुजरी आदि रखते हैं और गोवर्धन की पूजा करते हैं।
इस दिन गोवर्धन की पूजा जरूर करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन क्या होता है?
जानें गोवर्धन का अर्थ
सबसे पहले यह जानों की शब्द क्या कहता है गो और वर्धन दो शब्दों से मिलकर बना है गो का अर्थ है गाय और वर्धन का अर्थ होता है बढ़ाना यानी गाय को बढ़ावा देना अपने घर में गाय का पालन करना ही गोवर्धन की असली पूजा है।
गाय का पालन करना ही गोवर्धन की पूजा करना है इसलिए गोवर्धन के लिए प्रत्येक घर एक गाय जरूर पालें। जब आप गाय पालन करोगे तब गाय को बचाया जा सकता है इसलिए ही यह त्यौहार मनाया जाता है कि आप गाय माता को ना भूल जाएं।
दीपावली के दूसरे दिन सबसे मेल मिलाप का दिन है इस दिन सब एक दूसरे से मिलने के लिए जाते हैं जिससे एक दूसरे में प्रेम बढ़ता है।
भैयादूज
दीपावली के दो दिन और गोवर्धन के एक दिन बाद भैया दूज आती है यह कार्तिक मां की शुक्ल पक्ष की दूज को मनाई जाती है यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है रक्षाबंधन में बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र का धागा बांधती है की भाई सदा अपनी बहन की रक्षा करेगा कभी भी बहन पर अधर्म की आंच नहीं आने देगा।
बहन अपने भाई से अथाह प्रेम करती है और जब उसका भाई खाना खा लेता है तब वह खाना खाती है इस प्रकार से वह यह चाहती है कि उसका भाई उसकी आंखों के सामने रहे इसलिए यह दिन विशेष तौर पर मनाया जाता है।
दीपावली और गोवर्धन से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
हमेशा अपने अंदर प्रकाश जलाए रखो जिंदगी में कभी भी अंधेरा मत होने दो।
प्रत्येक घर में गाय का पालन करो।
इसी के साथ-साथ प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो आप सभी को धनतेरस,दीपावली, गोवर्धन, भैया दूज, की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।


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