सनातन धर्म
दुनिया का सबसे पावन और पवित्र धर्म जो है वह यही धर्म है आप सभी सनातन धर्म से संबंध रखते हैं प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो सनातन धर्म मां प्रकृति के नियम है। जिसको कोई नष्ट नहीं कर सकता। इसका कोई आदि और अंत नहीं है। इसको मिटाने वाला खुद मिट सकता है। जब तक मां प्रकृति है तब तक यह धर्म भी हैं और जो मां प्रकृति के नियम पर चलता है और उसकी पूजा करता है उसे प्रकृति अपने जैसा सर्वशक्तिमान बना लेती है और अपनी ताकत उस इंसान में भर देती है।
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| धर्म |
हिंदू धर्म
इसलिए सिंधु सभ्यता के लोगों को दूसरी तरफ के लोगों के मुख से हिंदू सभ्यता नाम निकलता था इसलिए धीरे-धीरे वहां की सभ्यता नष्ट हो गई किसी प्राकृतिक आपदा के कारण लोग इधर-उधर चले गए और लोगों ने हिंदू शब्द को पकड़ लिया और असलियत को भूल गए।
अपने मूल को भूल गए आज भी हम गांव में बहुत से पुराने लोगों से सुनते हैं वह स के उच्चारण को ह के उच्चारण में बोलते हैं। अपने अगर इतिहास पढ़ा है,अगर आपको कुछ इतिहास याद है तो उसमें भी हमारे प्राचीन सभ्यता के बारे में यह साफ लिखा हुआ है अब आप असलियत जान चुके हैं कि आप सब कौन हैं?
सनातन धर्म में आर्य और अनार्य कौन थे?
सनातन धर्म में भी दो तरह के लोग थे एक आर्य और दूसरे अनार्य।
आर्य जो अपने को आर्य मानते थे वह पूर्ण पवित्र थे आर्य परम ब्रह्म का रूप थे परम ब्रह्म वह होता है जो पूर्ण रूप से साफ स्वच्छ शुद्ध निर्मल रहते हो जिसका खान-पान शुद्ध होता है,रहन-सहन अच्छा होता है। इनमें तन के तीन दोष चोरी, जारी, हत्या। मन के तीन दोष ईर्ष्या, घमंड, मनसा पाप। जुबान के चार दोष कड़वा वचन, झूठ, चुगली और चापलूसी। यह सब दोष आर्यों में नहीं थे। उनकी जगह शांति, संतोष, दया, धर्म, कहनी करनी एक, कुल मर्यादा, गुरु मर्यादा इन सभी नियमों पर आर्य चलते थे। यह उनके परम गुण थे।
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| मां प्रकृति की पूजा करें |
आर्य किसकी पूजा करते थे?
आर्य प्रत्यक्ष देवी देवता जिसमें जल, अग्नि, वायु, धरती, आकाश यानी पांच तत्वों की पूजा करते थे मा प्रकृति, सुर्य की पूजा किया करते थे और किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानते थे किसी भी भ्रमित बातों से दूर रहते थे।
अनार्यों के गुण
इनमें तन के तीन दोष- चोरी, जारी, हत्या।
मन के तीन दोष- ईर्ष्या, घमंड, मनसा पाप।
जुबान के चार दोष- कड़वा वचन, झूठ, चुगली और चापलूसी।
धन के दोष- जो लोग किसी की चोरी जारी हत्या करके झूठ बोलकर पैसे लाएगा उसका धन कैसा होगा? धन भी वैसा ही होगा जो व्यर्थ के कामों में लगेगा इसलिए यह लोग अपवित्र थे। जो धन अनुचित तरीके से कमाया हुआ होगा वह भी अपवित्र होगा।
अनार्य किसकी पूजा करते थे?
यह मां प्रकृति की शक्ति को नहीं मानते थे यह अप्रत्यक्ष देवी देवताओं को मानते थे यह कल्पित मूर्तियों की पूजा करते थे। देवी देवता नाम देने का है। लेने का नहीं परंतु यह लोग इनको जीवों की बलि चढ़ाने में विश्वास करते थे यानी इनमें अंधविश्वास फैला हुआ था।
अब आप अपने आप से तुलना करके देखो कि आप कौन हो और क्या बने बैठे हो?
अपने आप की पहचान करो और जांच करके देखो अगर आप में आर्यों के गुण हैं तो आप आर्य हैं और अगर आप में अनार्यों के गुण है तो आप अनार्य हैं।
दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?
ऊपर बताई हुई बातों से आप समझ गए होंगे की सबसे पुराना धर्म कौन सा है?
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| मां प्रकृति का धर्म |
सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है क्योंकि जब से मां प्रकृति का निर्माण हुआ तब से उसके नियम बनें और उन नियमों को मनुष्य ने अपनाया और उन नियमों पर चलकर ही मनुष्य ने भक्ति की और अपने आप को विकसित किया।
आपको कौन सा धर्म अपनाना चाहिए?
मां प्रकृति सर्वशक्तिमान है और उसके नियम तब से हैं जब वह निर्मित हुई और उसके नियम तब तक ही रहेंगे जब तक मां प्रकृति है और मां प्रकृति को कोई नष्ट नहीं कर सकता यह तो खुद बनती है और खुद ही बिगड़ती है परंतु उसके नियम सदा रहेंगे मां प्रकृति सबकी मां है सबको जीवन देती है सबको रोटी, कपड़ा, मकान उसी से ही मिलता है। सनातन धर्म मनुष्य का बनाया हुआ नहीं बल्कि मा प्रकृति के नियम है। उसके बिना जीवन संभव नहीं है इसलिए आपको मां प्रकृति के नियमों पर रहकर सनातन धर्म अपनाना है।



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