प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है।
नाम दान क्या होता है?
नाम दान सतगुरु का दिया हुआ नाम है जो हमें दान देता है, जिसके सहारे हम बुरे विचार रोककर मन को एकाग्र कर इंसान खुद को जान सकता है, वैसे तो सारे नाम बराबर है आप कोई भी एक नाम लेकर रटने लग जाओ उसमें भी ताकत होती है लेकिन जो नाम सतगुरु देता है वह उसके शब्द ऐसे होते हैं जिसको रटने से आपकी जीभ कंठ कंवल में लगती है और उसका रस टपकना शुरू होता है, जिसे घट गंगा कहते हैं।
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| सतगुरु नाम दान |
नाम दान कौन देता है?
नाम दान एक सतगुरु संत ही दे सकता है जिसमें परमपिता परमात्मा की शक्ति आकर बोलती हो क्योंकि सतगुरु द्वारा दिए हुए नाम में प्राकृतिक ऊर्जा होती है।
नाम दान क्यों दिया जाता है?
मनुष्य जीवन एक बड़ी शक्ति है जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के मन में अनेक विचार आते हैं, मनुष्य जाति एक ऐसी जाति है कि इसको जो पढ़ाओगे वही ज्ञान प्राप्त करेगी सही रिश्ता बताओगे तो सही सीख लेगी गलत रास्ते की शिक्षा मिलेगी तो गलत रास्ता पकड़ लेगी क्योंकि पशु जन्म से प्रकृति नियम पर होते हैं लेकिन मनुष्य को सिखाया जाता है, इसलिए सतगुरु कई वर्षों बाद जन्म लेते हैं और परिवार (कुटुंब) समाज, देश में सुधार करते हैं और समाज को एक विचारधारा अपने नियम पर रहने वाली प्राकृति नियम पर रहने के लिए सभी को एक नाम देते हैं ताकि सबके विचार एक होकर सब संगठित हो जाए, यानी सबके विचार एक जैसा हो जिसे समाज संगठित होकर आगे बढ़ता जाए।
नाम दान कैसे दिया जाता है?
संत के लिए सभी मनुष्य एक जैसे होते हैं। वह सबको समान दृष्टि से देखते हैं उनकी नजरों में कोई छोटा बड़ा नहीं होता इसलिए वह निश्चित जगह पर सबको एक साथ सत्संग पंडाल में बैठकर नाम देते हैं और नाम तीन बार रटवाया जाता है ताकि नामधारी को याद हो जाए। सब परमपिता परमात्मा के घर से आए हैं और एक घर जाना है इसलिए सबको खुला नाम दिया जाता है। वहीं पर पहले नाम ली हुई संगत बैठी रहती है और वहीं पर नए बनने वाले शिष्य और शिष्या बैठे रहते हैं। किसी को भी अलग बैठाकर नाम नहीं दिया जाता है। सतगुरु के लिए सब बराबर है जो नाम रटेगा या सतगुरु के बताए रास्ते पर चलेगा वह आगे बढ़ता जाएगा।
नाम दान कहां दिया जाता है?
संत कभी भटकते नहीं, संत एक जगह रहकर सबको एक साथ एक जगह जो पहले से निश्चित कर रखी है वहीं पर नाम देते हैं।
नाम दान किसको दिया जाता है? नाम दान कौन ले सकता है?
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| सत्संग भवन में सत्संग करते हुए |
जो मनुष्य यह जानता है कि धर्म का रास्ता सबसे उत्तम है जो मनुष्य यह चाहता है कि वह मानव जीवन को जानना चाहता है, जो मनुष्य यह जानता है कि सतगुरु सत की शक्ति है जो सदा सही रास्ता बताते हैं। जो अपने आपको अध्यात्म से जोड़ना चाहता है। वे संत के पास जाकर नाम ले सकते हैं। इसमें सभी मनुष्य आजाद हैं, किसी पर कोई बंदिश नहीं है।
नाम रटने से क्या होता है?
कलयुग में नाम आधार, नाम रटकर उतरो पार।
मुफ्त का नाम रट लो मुफ्त की नाम की कमाई जिसने जाना उसने ही पाई।
जब देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तब अनेक रत्न, आभूषण, जहर (विश) वेद, पुराण, ग्रंथ अमृत, धन, माया मिले,
उसी तरह दुसरा उदाहरण :-
दूध को बिलोने के लिए झेरने का इस्तेमाल करते हो तब घी निकलता है ठीक इसी प्रकार संत का दिया हुआ नाम रटते हैं हमें नाम रूपी झेरने से तन को बिलोते हो नाम रटते हो तब इस तन से ज्ञान, धन, अमृत पान करते हैं, जिस अमृत का पान कर यह जिंदगी धन्य हो जाती है, मनुष्य जिंदगी में सदा निर्मल, निर्लेप, निर्गुण आनंदित रहता है, जब मनुष्य इस संसार में आकर सत् भक्ति, सतकर्म करता है तब पूरी जिंदगी सुखी जीवन जीता है और जब इस संसार से जाता है तब अपना एक नया इतिहास लिख कर जाता है। जिससे आने वाली कई पिढि़या धन धन्य हो जाती है।


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