पक्का सौदा आश्रम रूहानी कॉलेज सदलपुर

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

मां प्रकृति की पूजा ही क्यों करनी चाहिए? जानें इसका मुख्य कारण क्या है?

प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो परमपिता परमात्मा ने बहुत ही अच्छा समय दिया है। इस पल के लिए परमपिता परमात्मा का धन्यवाद करते हैं कि हे प्रभु तेरा धन्यवाद हो और धन्यवाद हो माँ प्रकृति का जिन्होंने हमें यह जीवन दिया मां प्रकृति के कारण ही हमारा जीवन चल रहा है जिन पांच तत्वों को मिलाकर प्रकृति का निर्माण हुआ उन्ही पांच तत्वों को मिलाकर जीवो का निर्माण हुआ। 
 जो पिंड सो ब्राह्मड
मां प्रकृति 
 यानी जो हमारे शरीर के अंदर हैं हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना यही पांचो तत्व बाहर भी हैं । 

 प्रकृति के पांच तत्व

जल अग्नि वायु धरती आकाश
पांच तत्वों से मिलकर बना शरीर
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो माँ प्रकृति सर्वशक्तिमान है
 प्रकृति से बढ़कर कुछ नहीं जो इंसान प्रकृति से मिलकर चलता है वह आगे बढ़ता जाता है और जो इंसान प्रकृति के विरुद्ध होता है वह एक दिन नष्ट हो जाता है। प्रकृति लेना भी जानती है और प्रकृति देना भी जानती हैं सब जीवों का जीवन प्रकृति पर ही निर्भर है। 

 जीव की मूलभूत आवश्यकताएं

 रोटी :- प्रकृति से हमें अनाज फल मेवा मसाले, जिन शाकाहारी भोजन पर हमारा जीवन निर्भर है वह सब हमें प्रकृति से मिलता है। और जिसे किसान बड़ी मेहनत से उत्पादन करता है इसीलिए अनाज के कण-कण की इज्जत करें  कभी भी बेकार न करें। 
कपड़ा:- प्रकृति हमें गर्मी और सर्दी से बचने के लिए ऐसी फसल देती है जिससे हम अपने तन को ढक सकें , यह हमें प्रकृति के पेड़ पौधों से ही मिलता है जैसे कपास, नरमा जिनसे हमारे कपड़े बिस्तर आदि बनाए जाते हैं। 
 मकान:- जिन चीजों से हमारे मकान बनाए जाते हैं वह सब हमें प्रकृति से ही मिलता है।
मूलभूत आवश्यकताएं रोटी कपड़ा मकान
माँ प्रकृति के लिए सभी जीव बराबर है
 जिस प्रकार एक माँ के लिए अपने पुत्र पुत्ररियां सभी बराबर होते हैं जब वह आपस में लड़ते हैं एक दूसरे को मारते हैं तो माँ को दुख होता है। 
उसी प्रकार माँ प्रकृति के लिए छोटे से छोटे जीव से लेकर चिट्टियां, पशु, पक्षी, जानवर, इंसान
 जलचर, उभयचर, नभचर

 इन स्थान पर रहने वाले जीव प्रकृति के लिए बराबर है। जो जीव इस धरती पर आया है वह जीवन जीना चाहता है, चाहे वह साधारण हो या जहरीला हो, सबको अपने जीवन से प्यार होता है। इंसान प्रकृति के नियम को भूल जाता है लेकिन पशु, पक्षी, जानवर प्रकृति के नियम को कभी नहीं भूलते। 

 अकेलापन दूर करती है माँ प्रकृति


 सबको जीवन देने वाली खुले वातावरण में सांस देने वाली, माँ प्रकृति जो इंसान प्रकृति से जुड़कर रहता है वह कभी अकेला नहीं होता जब इंसान मां प्रकृति से जुड़ जाता है तो वह ब्रह्मांड के साथ जुड़ जाता है ब्रह्मांड के साथ जोड़ने वाला कभी अकेला नहीं रह सकता। अगर आप भी अपने आप को अकेला महसूस करते हो तो माँ प्रकृति से बात करके देखो वह आपका अकेलापन दूर कर देगी आपको निर्मल जीवन देकर शांति भर देगी जहां पर शांति होती है वहां सब कुछ होता है शांति के सबसे अधिक नजदीक केवल प्रकृति ही है प्रकृति से जुड़ने के बाद आप निश्चित शांति प्राप्त कर पाओगे। 
 बात करके देखो नदी नाले पहाड़ों से पेड़ पौधों से फूलों से इनसे बात करने से आप में शक्ति बढ़ती जाएगी। किसी से दूर रहो बेशक लेकिन प्रकृति के सदा नजदीक रहना। 

सनातन धर्म में प्रकृति की ही पूजा होती है सनातन धर्म जिसमें संपूर्ण प्रकृति के नियम है यह धर्म प्रकृति का है जो सदा पनपता रहेगा। इसमें प्रत्यक्ष देवी देवताओं की पूजा होती है। 
 जिसमें धरती जल अग्नि वायु आकाश सूर्य चंद्र
 जिसमें किसी भी प्रकार का कोई अंधविश्वास नहीं है जो है सब आपकी आंखों के सामने हैं। 

 भारत माता की जय

भारत माता की जय में हम यहां की नदी नाले पेड़ पौधे जीव जंतु पशु पक्षी इंसान इन सब को मिलाकर भारत माता बनती है और हम सब इन्हीं की जय बोलते हैं।  इसलिए जो प्रकृति हमें सब कुछ देती है  उसकी जय बोलने में तो हमारा कुछ नहीं लगता इसलिए बोलो भारत माता की जय। 
इसके साथ प्रिय ज्ञानी सतपुरूषो 
 हमें जीवन देने वाली प्रकृति की पूजा करें। 


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