दशहरा: विजयदशमी पर करें अहंकारी मन को निरंकारी
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो परमपिता परमात्मा ने बहुत ही अच्छा समय दिया है। आज का दिन बहुत ही शुभ दिन है। नवरात्रि पूर्ण होने के बाद में दशहरा आता है। यह हमारे शरीर में भी दर्शाता है जिस प्रकार मूल कमल से लेकर हम सहस्त्र चक्र में पहुंचते हैं जहां हमारा दसवां द्वार है नौ देवियों को सिद्ध करने के बाद हम दसवें द्वार में पहुंचते हैं जिसमें मां दुर्गा है जिसकी शक्ति 10 हाथों के बराबर हैं। मां दुर्गा नौ देवियों में सबसे शक्तिशाली देवी है! दुर्गा का अर्थ होता है दूर निगाहों वाली। बाहर मूर्तियां स्थापित करने का कारण यह है कि हम बाहर वाली मूर्ति को देखकर अपने अंदर वाली दुर्गा माता को पहचान जाए।
आज दशहरा है जिसे विजयदशमी भी कहते हैं। और इस दिन भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। आप सभी को दशहरा की शुभकामनाएँ।
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| भगवान श्री राम द्वारा अहंकारी रावण का अत |
इस संसार में धर्म से बढ़कर कुछ नहीं धर्म की सदैव विजय होती है और अधर्म का सदा नाश होता है। जब जब हमने देखा है इतिहास को पढ़कर ,
न्याय को बढ़ावा और अन्याय को सजा मिली है। इस दिन अत्याचार का शासन समाप्त कर दिया। और भगवान राम माता सीता से मिले। रावण एक बहुत बड़ा विद्वान था मंत्रों के कारण रावण में बहुत शक्तियां थी। रावण को चारों वेद कण्ठष्ठ याद थे और वह खुद श्लोकों की रचना किया करता था ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान जिसके बारे में आज ज्योतिषी ज्ञान देते हैं। रावण के लिखे हुए श्लोक रचना किए हुए रावण संहिता में मिलते हैं। रावण यह जान चुका था कि उसकी मृत्यु निश्चित है उसके मृत्यु राम के ही हाथों होगी परंतु फिर भी वह नहीं माना क्योंकि वह अहंकार का रूप था और जब किसी के अहंकार आता है तब ऐसा ही होता है किसी की नहीं मानता। मरते हुए रावण ने कहा था कि मेरी कर इच्छाएं अधूरी रह गई।
- अग्नि में धुआं ना छोड़ना -आज आप देख रहे हो की अग्नि में धुआं नहीं है जब गैस चूल्हा, बिजली का चूल्हा इनमें धुआं नहीं उठाता।
- आकाश में पैड़ी -आकाश में पैड़ी का अर्थ है घरों पर आना-जाना चांद मंगल आदि जो आज आप देख रहे हैं।
- आप से पहले बेटा ना मरे- ऐसा अभी तक हुआ नहीं है यह तब होगा जब लोग प्रकृति के नियम अपना लेंगे सत धर्म पर चलेंगे।
- सोने में सुगंधी
पहले के वेद उपनिषद शास्त्र सब संस्कृत भाषा में लिखे हुए हैं संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है और इस भाषा में देव शक्ति की ताकत है जब हम यह भाषा पढ़ते हैं इसमें श्लोक का उच्चारण करते हैं तो शरीर में शक्ति ताकत बढ़ती जाती है इंसान रूप मानसिक रूप से ताकतवर बन जाता है। इस शक्ति का ज्ञान होते हुए भी श्लोक का ज्ञान होते हुए भी रावण में अहंकार जाग गया। अहंकार जागने का अर्थ है श्रापित नगरी के नष्ट होने का समय आ गया या उसके शासन के नष्ट होने का समय आ गया। अहंकार का अर्थ होता है हम नहीं, अहम् यानि मैं, कार का अर्थ करने वाला
रावण परमपिता परमात्मा की सर्वशक्तिमान ताकत को भूल गया और कहने लगा कि मैं ही करता धर्ता हूँ। जब हम इस इतिहास को पढ़ते हैं और रावण और उसके पूर्वजों के बारे में जानते हैं तो पता चलता है यह एक श्रापित नगरी है जिसका अंत एक दिन निश्चित था यह सही कहा गया है विधि का विधान घूम फिर कर इस मोड़ पर ले आता है इस समय पर ले आता है अधर्म के सामने ऐसी शक्ति बनाकर खड़ी कर देता है। जो उसकी पतन का कारण बनें।
यही वह शक्ति भगवान राम में पेश होकर आई और रावण की पत्न का कारण बनी।
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| भगवान श्री राम की जय |


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