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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

श्राद्ध का महत्व: जानें पितृपक्ष पर पूर्वजों का कौनसा कर्ज पूरा किया जाना चाहिए?

 सबका मालिक एक विचार अनेक विचार अनेक क्यों विचार एक बनाओ परम शांति पाओ।

प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है।

जो मनुष्य इस संसार में आता है वह अवश्य ही जाता है यह विधि का विधान है इसे कोई नहीं रोक सकता जब इंसान इस संसार में आता है पूरी जिंदगी जीता है और कमाता है जो उसने पूरी जिंदगी कमाया वह अपने पुत्र पुत्रियों व परिवार को देकर जाता है। वह जब जाता है मृत्यु को प्राप्त होता है तब अपने परिवार के लिए घर जमीन जायदा छोड़कर जाता है जो वह उन पीछे रहने वालों को मुफ्त में ही मिलती है। हमारे माता-पिता ने हमें इतना पढ़ाया लिखाया इतना बड़ा किया जो प्रथम गुरु और भगवान का रूप है। जिस प्रकार हमें बड़ा किया पाला पोषा हमारे लिए दिन रात कमाया हमें शिक्षा दिलाइ और गुणवान बनाया खुद भूखे रहे लेकिन हमें खिलाया।
पितृ पक्ष पर करें पूर्वजों का सम्मान
इसलिए अपना भी यह फर्ज है कि जिस प्रकार माता-पिता ने हमें रोटी कपड़ा शिक्षा दी बड़ा किया इसी प्रकार हम भी उनका सम्मान करें और उनके बुढ़ापे में एक बच्चे की तरह रक्षा करें क्योंकि बुढ़ापे में दिमाग बच्चों की तरह हो जाता है। उनके जिन्दा जी किसी की वस्तु की कमी ना आने दे। वह केवल मान और सम्मान चाहते हैं क्योंकि धन तो उन्होंने पूरी जिंदगी कमाया है। उन्हें बुढ़ापे में मानव सम्मान की आवश्यकता है जिस प्रकार हमको बचपन में होती है बात बताना कई बार पूछने पर कई बार बताना फिर भी क्रोध नहीं किया। जो भी मांगा वह हमें दिलाया हो सके महंगा नहीं पर सस्ता जरूर दिलाया और उनके बाद उनके जाने के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए दान करना श्रद्धा करना श्रद्धा का अर्थ है श्रद्धा का भाव मन में लाना उनके प्रति श्रद्धा जिनका खून हमारी रगों में दौड़ रहा है जिनकी वजह से जिन भगवान रूप माता-पिता की वजह से हीरा रुपी जीवन मिला इसके लिए सनातन धर्म में कुछ नियम और समय लागू किया गया है उस समय पर श्रद्धा के साथ उनको याद करें उनके लिए कुछ दान करें अगर आपने उनके लिए जिंदा जी अगर कुछ नहीं किया तो मरने के बाद दिखावे के लिए पैसा खर्च करना व्यर्थ है क्योंकि जिस इंसान को जिंदा जी सहारा नहीं दिया तब बाद में खर्च किए धन से उनको शांति कभी नहीं मिल सकती क्योंकि जुगत का जीना ही मुक्ति है। अगर उन्होंने पूरी जिंदगी दुख देखा तो अब मरने के बाद उन पर पैसा लगाना कितना उचित है? श्रद्धा का भाव रखने से परिवार में मुक्ति, पूर्वजों का भार नहीं रहता यह सुख से जीवन जीते हैं जब हमें पूर्वजों ने कमाई करके जो दिया है वह जिसको मिला उसके लिए वह मुक्ति का ही है इसलिए श्रद्धा का भाव रखकर उन पर सदा समय आने पर उनके लिए दान करें, याद करें उसे सम्मान करें।
माता-पिता की सेवा उचित 

पितृ पक्ष की अवधि सोलह दिन सोलह संस्कार है।

पितृ पक्ष सोलह दिवसों का वह समय है। जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक इंसान के 16 संस्कार होते हैं बचपन मुंडन शिक्षा शादी, इस पर आधारित श्रद्धा आते हैं जिनमें पूर्ण रूप से शुद्ध रहकर निर्मल रहना और दान करना, अपने पूर्वजों के नाम से विशेष रूप से भोजन, दान का महत्व है।

श्राद्ध में हवन का महत्व 

जब श्रद्धा आते हैं 16 दिनों में हमें हवन करके प्रकृति की शुद्धता पर बल देना चाहिए यानी इन दिनों में घर में हवन करवाएं। जिससे प्रकृति शुद्ध होती है और प्रकृति शुद्ध होने से हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और जो वर्तमान समय में रह रहे हैं। उनको भी फायदा होता है। 

भुखे को भोजन या दान

श्राद्ध में आप भूखे को भोजन, कपड़ा आदि दान करें आप पशु पक्षी जानवरों को भी अनाज खिला सकते हैं जैसे पक्षियों के लिए दान गाय के लिए चारा, कुत्ते को रोटी।

मां बाप की सेवा 

पितृपक्ष पर पितृ कर्ज पूरा करें।

मनुष्य पर तीन कर्ज होते हैं पहले पितृ कर्ज़ दूसरा देवगन तीसरा गुरु कर्ज इसलिए पितृ कर्ज चुकाने के लिए बहुत ही शुभ समय है। हमारे पूर्वज जो भी कुछ देकर जाते हैं वह पितृ कर्ज के रूप में हमारे ऊपर कर्ज होता है। इन दिनों में अपने पिता के कर्ज से मुक्त हो जाएं और एक स्वतंत्र जीवन जीएं।

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