सबका मालिक एक विचार अनेक विचार अनेक क्यों विचार एक बना परम शांति पाओ
जिओ सच बोलकर जियो चाहे 2 दिन झूठ बोलकर 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जिओ जीव कल्याण के लिए जियो चाहे 2 दिन स्वार्थ के लिए 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जब तक ना देखो नैना मत मानो किसी का कहना यह दुनिया धोखे का जाल है कहीं भ्रम चक्र में ना डाल दे मानो तब जब आप अनुभव करके देख लो।
प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बहार मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है।
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| मकर संक्रांति पर सूर्य की दिशा |
मकर संक्रांति: प्रत्यक्ष सूर्य देवता का मकर राशि प्रवेश व उत्तरायण की ओर अग्रसर
मकर संक्रांति पर सूर्य का महत्व
भारतीय सनातन धर्म में व्रत त्यौहार ऋतुओं का बहुत महत्व है इसी प्रकार मकर संक्रांति का बहुत महत्व है हर एक प्राकृतिक बदलाव सनातन धर्म में बहुत महत्व रखता है। बदलाव ही जीवन है। और परिवर्तन ही संसार का नियम है जो प्रकृति परिवर्तन से ही चलती है। मकर संक्रांति भी एक प्राकृतिक परिवर्तन है। जिसमें मां प्रकृति परिवर्तित होती है। सर्दी का समय आना शुरू होता है और सूर्य देव दक्षिणायन में गमन करते हैं। धीरे-धीरे दक्षिण में जाना शुरू होता है जिसे दक्षिणायन कहते हैं और उत्तर में धीरे-धीरे बर्फ जमना शुरू हो जाती है जब सूर्य पूर्ण रूप से दक्षिण में आ जाता है तब उत्तर में बहुत ठंड पड़ती है। और सर्द हवाएं चलती है इसी प्रकार जब दक्षिणायन की तरफ 6 महीने होते हैं तब सूर्य देव धीरे-धीरे उत्तरायण में आना शुरू होता है। इस शुरुआत के दिन से उत्तर की ओर यानी उत्तरायण के समय पहले दिन को ही मकर संक्रांति कहते हैं। और सूर्य के उत्तर की ओर आने को उत्तरायण कहा जाता है। यह भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसको खुशियों से मनाते हैं। लोग जल में स्नान करते हैं और सूर्य पूजा करते हैं जब सूर्य देव उत्तर में आना शुरू होता है तब उत्तर की तरफ से सूर्य के कारण गर्मी बढ़ने लगती है और पर्वतों से सर्दी में ज़मीं बर्फ पिघलने लगती है जिससे नदियां पानी से उफान पर हो जाती है। यह प्राकृतिक नियम है जो हर छठे महीने होता है और साल में दो बार होता है एक बार उत्तर से दक्षिण की ओर और दूसरा दक्षिण से उत्तर ओर। यह त्यौहार सूर्य देव को समर्पित है।

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