स्वास्थ्य ही धन है।
सबका मालिक एक विचार अनेक विचार अनेक क्यों विचार एक बनाओ परम शांति पाओ
जिओ सच बोलकर जियो चाहे 2 दिन झूठ बोलकर 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जिओ जीव कल्याण के लिए जियो चाहे 2 दिन स्वार्थ के लिए 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
जब तक ना देखो नैना मत मानो किसी का कहना यह दुनिया धोखे का जाल है कहीं भ्रम चक्र में ना डाल दे मानो तब जब आप अनुभव करके देख लो।
प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है।
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| पांच तत्व 25 प्राकृतियों से बना शरीर। |
परमपिता परमात्मा सबको स्वच्छ जीवन देता है सबको निरोग पैदा करता है। परंतु फिर भी हीरे जैसे तन को रोग कहां से लग जाते हैं क्या कारण है कि हम जन्मे तब वह साफ और सुंदर थे परंतु धीरे-धीरे समय बीतता जाता है और यह शरीर कुरूप और रोगी होने लगता है तन और मन को रोग लग जाता है।
हमारा शरीर प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो हमारा शरीर 40 चीजों का एक मिश्रण है। जिस मन कहते हैं यह 40 चीजों से मिलकर बना है। पांच तत्व 25 प्राकृतिक और 10 इंद्रियां इन 40 चीजों के बने हुए मन पर बहुत से नियम भी लागू होते हैं क्योंकि यह 40 चीजें 40 प्रकृति है।
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| पांच तत्व 25 प्रकृति 10 इंद्रियां |
यह प्रकृति होने से इनको प्राकृतिक के अनुसार जीवन बिताना होता है 40 चीज जब प्रकृति के अनुसार कार्य करती है तब हमारा तन साफ स्वच्छ रहता है जब बचपन में होते हैं तब हमारा शरीर माता-पिता के हाथ में होता है तब वह हमें सही रखते हैं यानी शुद्ध खाना पीना शरीर को सही रखना उसके बाद जब शरीर आप खुद के तरीके से जीने लगते हैं तब इंसान बहुत सी अप्राकृतिक चीजें अपना लेता है। और मां प्रकृति के नियम भूल जाता है। जैसे धूम्रपान नशा विषय शराब आदि जिससे उसमें व्यसन बुरी आदतें बढ़ती जाती है और जब प्रकृति की विपरीत खान-पान हो जाता है। तब रोग लगना सामान्य बात है क्योंकि आप जैसा खाओगे वैसा ही वह शरीर में लगेगा। अगर कोई जानवरों के मांस को खाता है तो उसको यह सोचना चाहिए की जानवर की उम्र कितनी है और इंसान की उम्र कितनी होती है। जानवरों की उम्र लगभग 5 से लेकर 10 20 साल तक होती है लेकिन मनुष्य की उम्र लगभग 70 से ज्यादा होती है अब आप तुलना कीजिए जो मांस खाया है वह 5 10 20 साल बाद गलना शुरू हो जाएगा क्योंकि जीवों की उम्र इतनी ही है इसलिए शरीर में जो भी पसीना आएगा इसकी बदबू आनी शुरू हो जाएगी और शरीर में अनगिनत रोग पैदा होना शुरू हो जाएंगे
अपने शरीर को निरोग कैसे रखें
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो शरीर को निरोग रखने के लिए प्राकृतिक के नियम अपना लीजिए आपको कभी भी रोग नहीं लगेंगे यह शरीर प्रकृति ने बनाया है इसलिए जब इसकी चाबी आपको दे दी है तो आप इसे प्रकृति के अनुकूल रखिए। परमपिता परमात्मा ने यह शरीर दिया और कहा कि पुत्र यह अनमोल हीरा तुम्हें देता हूं इसे संभाल कर रखना इसलिए तुम्हारा काम है अब इस तन को कैसे रखते हो वह आप पर निर्भर है। परमात्मा अपना खुद का रूप देकर खुद के समान बनाकर भेजा है। तुम खुद बुराइयां अपना लो तो दोष किसका? परमात्मा ने इस शरीर में अनमोल पुर्जे लगाकर भेजें है भेजा है जिनकी क्षमता है उसकी क्षमता के अनुसार समय पर भोजन पानी नींद आलस जुम्बाई पूरी कीजिए इस रोकिए मत तुम प्रकृति के नियम पर चलिए प्राकृतिक नियम अपनाकर और अपने आप को सदा निरोग रखो जिस प्रकार ऋतुओं के अनुसार प्रकृति बदलती है उसी के अनुसार आप भोजन कीजिए इससे आप सदा निरोग और स्वस्थ रहेंगे।


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