मानसिक कमजोरी क्या है?
वर्तमान में हम देख रहे हैं कि मनुष्य की मानसिकता कैसे कम होती जा रही है। मनुष्य मानवता से आज इतना गिर चुका है कि कल्पना भी नहीं कर सकत बस अफ़सोस होता है कि ये मनुष्य भी इतना गिर जाएगा। आज के मनुष्य की मानसिक कमजोरी इतनी बढ़ चुकी है वर्तमान की पढाई के बावजूद, बहुत पढ़ा लिखा होने के बावजूद, इतनी डिग्री लेने की बावजुद अगर उसे कोई थोडा सा भी लालच देकर काम करवाना चाहे तो वह मनुष्य कार्य के परिणाम के बारे में जानें बिना, लाभ हानि के बारे में भी नहीं देखता यानी थोड़े से खुद के लाभ के लिए, स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकता है। उस समय वह अपना पराया कुछ नहीं देखता केवल स्वार्थ का चक्र उसके सिर पर चलता रहता है। प्रिये ज्ञानी सतपुरुषो हमें चिंता केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्की पूरे देश की है। क्योंकि देश और समाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण होता है।
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| मजबूत मानसिकता |
मनुष्य को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए माता-पिता और शिक्षण संस्थान की कितनी भूमिका?
बचपन है बुराइयों से बच्चे रहने का, बचपन में अगर माता पिता जागरुक रख कर अच्छा पढ़ाया, लिखाया अच्छी शिक्षा दी तो वह आगे चलकर बुराइयों से नफ़रत और अच्छाइयों से प्रेम करने लग जाएंगे। माता पिता ने जहां तक हो सके बुराइयों से बचाकर रखा लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है। स्कूल, कॉलेज जाता है। तब वहां कैसी शिक्षा दी जाती है, वहां पर कैसा इतिहास पढ़ाया जाता है, सच्चा या झूठा, युवा अवस्था में स्कूल की शिक्षा का सबसे ज्यादा यानी पूरी जिंदगी की नींव वहीं पर बनती है।इसी समय वह संगति करता है और संगत कर असर सबसे ज्यादा पड़ता है और युवा अवस्था में वहीं अपने दोस्तों की बातें ज्यादा मानता है। संगती अगर सही है तब आगे बढ़ता जाएगा। संगती अगर गलत अपना ली तब उसका भविष्य बिगड़ सकता है। क्योंकि मनुष्य को जो सिखाया जाता है वही सीखता है। पशुओं में प्राकृतिक गुण होता है वह सदा प्रकृति के नियम पर रहते हैं। इंसान को जब शिक्षा दी जाती है तब वह जान पाता है।
आज इतनी पढ़ाई करने के बाद मनुष्य स्वार्थ के लिए हत्या, अपराध, चोरी, जारी नशा, विषय, करना शुरू कर देता है, यह मनुष्य इतना जघन्य अपराध करता है उस पर दया के बारे में भी नहीं सोच सकते। आज नर, नारी की हत्या, नारी, नर की हत्या कितने निर्मम तरीके से कर देते हैं, कहीं तो रक्षक ही रक्षक बन जाते हैं। अशुद्ध भाषा, अशुद्ध शब्दों का प्रयोग करना गलत शब्द बोलने में आज के समय अपने आप को बड़ा उच्च समझते हैं, वह माता पिता और बड़े जनों के सामने ही ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं अगर उनकी सन्धि-विच्छेद करके देखे तब पता चलता है कि वह कितना गलत शब्द बोल रहे हैं। सोचो और विचार करो तब इस पढाई के बारे में आप क्या सोचते हैं। जो भारत का सही इतिहास पढ़ा गया। अगर भारत का सही इतिहास पढ़ा गया है तो आज जो इतिहास में लिखा है वह बहुत से पुराने स्थलों के गेट बंद क्यों कर रखे हैं। सच्चाई को सामने लाने से ही इतिहास सही माना जाएगा जिस प्रकार कि धार्मिक मान्यता को तब सही माना जाता है जब वह वैज्ञानिक तोर पर सही हो। इसलिए आज का युग तो वैज्ञानिक युग है। सोध करके वैज्ञानिक ही बता देंगे। सच्चाई का पता चल जाएगा।
मानसिक रूप से मजबूत कैसे बनें?
भारत का सही इतिहास पढ़ा जाए- यहां हम किसी विवाद के लिए बात नहीं कर रहे बाल्की भारत को उसका सही इतिहास सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, राजा भरत का इतिहास पढ़ाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग भारत की महिमा और महत्व को जान सकें जिससे उनकी मानसिक शक्ति मजबूत हो बनें।
गुरुकुल शिक्षा पद्धति-गुरुकुल शिक्षा पद्धति ऐसी शिक्षा पद्धति है जिसमें मानसिकता को मजबूत बनाने के लिए ऐसी सजा दी जाए जिसे विधार्थी नाराज भी न हो और सीख भी जाए, मानसिक रूप से मजबूत भी बन जाए। गुरुओं के द्वारा व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता था जो पूरी जिंदगी काम आता है। आत्म ज्ञान, अध्यात्म ज्ञान, वैदिक विद्या, शास्त्र, पुराण, वेदों का ज्ञान दिया जाए। व्याकरण का ज्ञान दिया जाए जिसे वह शुद्ध भाषा के बारे में जान पाएंगे।
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| मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति बुराइयों से दूर रहता है। |
मानसिक रूप से मजबूत बनो
आज देश में बुरी वृतियां ज्यादा फैली हुई हैं, जब वह बुरी वृत्ति अपना लेता है तो मनुष्य अच्छाई को कम और बुराई को ज्यादा पकड़ रहे हैं। मनुष्य बुराइयों की तरफ ज्यादा आकर्षित होता है। अच्छाईयों की तरफ कम। जब वह बुरी वृतियां अपना लेता है तो मानसिकता कमजोर होती है। अच्छी वृतियां अपनाने से मानसिकता मजबूत होती है। सत, अच्छी वृत्तियों में ताकत होती है। सत पर चलने का आनंद अच्छी वृत्तियों पर चलने का आनंद वहीं जानता है जो उन पर चलता है चाहे जीवन में कितने ही सुख-दुख, तकलीफ आए। वह सदा सत पर ही रहता है।
आओ सब मिलकर आगे बढ़ते जाएं, सबको अच्छी शिक्षा, संस्कार, विद्या, ज्ञान देकर मनुष्य की मानसिकता को मजबूत बनाएं।


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