प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो तुम्हें जीवन मिला इस जीवन को तुम कितनी ऊँचाइयों पर या कितना गिराना, कितना अमीर और कितना गरीब, कितना आजाद रहना है कितना गुलाम, कितना अंधेरे,उजाले में और कितना डर,निडर रहना चाहते हैं वह सब तुम पर निर्भर करता है क्योंकि परमात्मा ने जीवन तुम्हें सोंपा है, इसके अंदर बहुत खजाना है, इस खजाने की चाबी मालिक ने आपके हाथ में दी है।
जब परमपिता परमात्मा ने आपको सब कुछ दिया है तो फिर क्यों चक्रों में पड़ना, तुम जिनका विचार दिमाग में अधिक रखते हो वही आपके पास आने शुरू हो जाते हैं।
भूत को मानते हो तो भूत,देवी देवता को मानते हो तो देवी देवता और परमात्मा को मानते हो तो परमात्मा की राह मिल जाएगी परमात्मा की राह पर चलने वाले पूजनीय बन जाते हैं।
![]() |
| मनुष्य के कर्म ही भूत प्रेत होते हैं। |
मनुष्य जीवन में सब कुछ होता है। नीचे दिए हुए भूत और प्रेत आत्मा से संबंध प्रश्नो के उत्तर से जान पाएंगे कि असलियत क्या है?
क्या भूत, प्रेत आत्मा होती है?
प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषो भूत, प्रेत आत्मा होते हैं लेकिन तुम इसको तब मानो जब आप इसको पूर्ण रूप से जान लो क्योंकि यह ब्रह्माण्ड की ऊर्जा होती है जो दो प्रकार से काम करती है। अच्छे को बढ़ावा और बुरे को सजा
भूत क्या है?
प्रिये ज्ञानी सतपुरुषो जो बीत गया वह सब भूत है, तुमने बीते हुए समय में क्या कर्म किये, उस बीते समय में अच्छे कर्म किए वह साथ देना शुरू कर देते हैं अगर बुरे किए हैं तो कर्म का कर्ज पूरा करने के लिए भूत के रूप में आते हैं।
प्रेत आत्मा क्या है?
प्रेत आत्मा ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है जब वह आत्मा शरीर रूप में थी तब उसके साथ किसने अच्छे कर्म किये उसके भले के लिए और जिसने उसके साथ बुरे कर्म किये उसका भुगतान लेने वाली ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है।
क्या भूत प्रेत इन्सान को सताते है?
प्रिये ज्ञानी सत्पुरुषो जो आत्मा पहले जीव रूप थी जो ब्रह्माण्ड में समा हो गई, पहले बताया जैसे कि भूत प्रेत ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है। जो हर पल काम में लगी रहती है। उस समय हर जीव का हिसाब रखती है, कर्म का लेखा जोखा रखती है, जिस मनुष्य ने बुरे कर्म किए हैं जैसे किसी को सताया, मारा, हत्या, चोरी, जारी, किसी को कड़वा वचन बोला उन सबका भुगतान करवाती है लोग सोचते हैं कि उसको बहुत सताते हैं। असलियत में मनुष्य के खुद के कर्म होते हैं। जिसने जैसा कर्म किया वैसा फल मिला। जिस इंसान ने बुरे कर्म किये ही नहीं उसे डरने की क्या ज़रूरत है। वह हमेशा आज़ाद रहता है क्योंकि भूत और प्रेत आत्मा उसको सताते हैं जिसने बुरे किये हैं।
भूत प्रेत कौन है और कैसे बनते है?
भूत और प्रेत आत्मा को मनुष्य के कर्म जन्म देते हैं, जिसने बुरे किया, गलत काम किया, वही कर्म बाद में भुगतान करवाने के लिए भूत प्रेत का रूप लेकर आते हैं।
भूत या प्रेत आत्मा क्यों आती है?
संसार का कर्म चक्र चलता रहता है। इस चलते हुए कर्म चक्र में मनुष्य ने जो गलत किया उसका हिसाब भी देना होता है, तो वह हिसाब करने वाली ताकत को आने से कोई नहीं रोक सकता।
क्या भूत प्रेत की देह होती है?
नहीं,भूत, प्रेत आत्मा की देह नहीं होती वह ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है।
भूत और प्रेत आत्मा में क्या अंतर है?
भूत मनुष्य के बीते हुए खुद के बुरे कर्म है और जिस जीव को सताया जाता है यानी कि किसी ने दूसरे जीव को सताया वह मृत्यु के बाद शरीर छोड़ कर ब्रह्माण्ड की उर्जा में सामिल हुई और कर्म के अनुसार जिसने सताया उसके पास प्रेत आत्मा के रूप में पहुंच कर भुगतान किया।
भूत प्रेत से किसलिए डरते हैं आप?
अगर आप अच्छे कर्म करते हैं तो डर नहीं लगेगा। डरते वो है जो बुरे काम करते हैं। इसलिए अगर आप सही तरीके से बताए रास्ते पर चल रहे हैं, मानवता के नियम पर चल रहे हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है।
भूत और प्रेत आत्मा कहाँ रहते हैं?
भूत और प्रेत आत्मा ब्रह्माण्ड की ऊर्जा में है। जो क्रम के अनुसार है वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उनका स्थान है, वह सभी जगह है, जिस प्रकार परमात्मा कण कण में है। वह भी परमात्मा की ऊर्जा है।
भूत और प्रेत आत्मा से छुटकारा कब मिलता है?
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो जब मनुष्य के बुरे कर्म से पुण्यकर्म ज्यादा हो जाते हैं तब ब्रह्माण्ड/परमात्मा की ऊर्जा नकारातमक से साकारात्मक हो जाती है। लेकिन मनुष्य सोचता है तूने भूत या प्रेत आत्मा को काबू करवा दिया। पर सच में ऐसा कुछ नहीं होता प्रकृति सर्वशक्तिमान है। किसी को अपना पराया नहीं समझती उसके लिए सब एक समान है और सबको कर्मों का हिसाब चुकाना पड़ता है। इसलिए भूत, प्रेत के चक्र से बचना है तो सदा सत कर्म करो।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Like