शुभ और धार्मिक कार्य में नारी का महत्व शुभ और धार्मिक कार्य के लिए शुद्ध कौन और अशुद्ध कौन होता है मनुष्य में शुद्ध और अशुद्ध क्या है?
आज समाज में फैली हुई असमानता को जाने जब असमानता को जान पाएंगे तब ही सामान्य लाई जा सकती है धार्मिक कार्य के लिए या कहीं धार्मिक स्थलों पर जाना नारी को अनुचित मानते हैं कहीं पूजा पाठ में शामिल होने को अनुचित मानते हैं कहीं धूप दिया करने को अनुचित मानते हैं देखो और जानों पूजा पाठ करने के लिए शुद्ध और अशुद्ध कौन होता है।
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| धार्मिक कार्य में नर और नारी का महत्व |
घर में नारी का महत्व
जहां नारी घर को सजाती है सफाई रखती है जब नारी घर पर होती है तब घर फूलों की तरह खिला रहता है वह सबके लिए खाना बनाती है सबके कपड़े धोती है यानी आप जो कपड़े पहनते हो उनको साफ सुथरा पवित्र करके वह नारी देती है। नारी के कारण घर में प्रेम, ममता, स्नेह बढ़ता है नारी के कारण ही घर का वंश बढ़ता है। जिस घर में नारी नहीं उनके वंश वहीं रुक जाते हैं। अब आप जानो घर का वंश जिस नारी से बढ़ता हो क्या वह अशुद्ध हो सकती है? जब आप घर पर जाते हो तो खाना तैयार मिलता है क्या वह अशुद्ध हो सकती है? यह सत्य है कि सभी नारियों एक समान नहीं होती, सभी नर एक समान नहीं होते परंतु पूर्ण नारी जाती तो अशुद्ध नहीं होती उसमें चार प्रकार की नारियां हैं जैसे एक चतुर चटोरी फुहार कलेशन इस प्रकार जो चतुर नारी होती है वह अपने घर को आगे बढ़ाती है शुद्धता रखती है वह पवित्र हैं उसमें कोई अशुद्धता नहीं है।
धार्मिक कार्य के लिए नारी का महत्व:-
धार्मिक अनुष्ठान पूजा के लिए सनातन धर्म में नर और नारी दोनों का महत्व है। सनातन धर्म में नारी परम पूजनीय है। नारी धर्म की प्रतीक है। बहुत से स्थानों पर मासिक धर्म चक्र के कारण नारी को अशुद्ध मानते हैं इसलिए धार्मिक अनुष्ठान में उनको जाने नहीं देते या रोक देते हैं लेकिन मासिक धर्म चक्र के कारण ही मनुष्य का जन्म होता है। रोक लगाने वाले इस बात को भूल जाते हैं कि उनका जन्म कैसे हुआ है और सबके मन में यह बैठा दिया जाता है कि यह अशुद्ध है इसलिए पूजा में शामिल नहीं हो सकती और असलियत में नारी भी यह मानने लग जाती है कि वह अशुद्ध है परंतु ऐसा नहीं है तुम असलियत जानो मासिक धर्म चक्र के कारण ही मनुष्य का जन्म हुआ इसलिए यह चक्कर उन सब अनुष्ठान से भी महत्वपूर्ण है इसके कारण कोई शुभ कार्य अशुद्ध नहीं हो जाता यह भ्रम में डालने की बातें हैं की नारी अशुद्ध है अपवित्र हैं भ्रमिक बातों से दूर रहो और नारी का सम्मान करो नारी का अपमान करने वाले इस बात को भूल जाते हैं कि तुम्हारी माता बहन बेटी पत्नी नारी ही तो है धार्मिक कार्य के लिए नर और नारी का समान होना जरूरी है बस यह जानले की यह शुद्धता विचारों की है।
नर और नारी में शुद्ध कौन है?
शरीर में प्राकृतिक क्रियाएं चलती रहती है जो नर और नारी शुद्ध विचार रखते हैं निर्मल रहते हैं वह शुद्ध है विचारों की, सोच की शुद्धता शुभ कार्य के लिए जरूरी है। अगर आप धार्मिक कार्य कर रहे हैं और मन में बुरे विचार आएंगे तब चाहे नर हो चाहे नारी हो दोनों अपवित्र ही हैं, अशुद्ध ही हैं, लेकिन शुभ कार्य के दौरान आपके मन में सुंदर-सुंदर सकारात्मक विचार आएंगे तब वह पवित्र है और शुद्ध भी है इसलिए शुभ कार्य के लिए विचारों की पवित्रता होना जरूरी है। जिनके विचार शुद्ध हैं सोच सकारात्मक हैं तब वह जो कार्य कर रहे हैं वह सफल होगा।

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