भारतीय धर्म संस्कृति सनातन धर्म में व्रत का बहुत महत्व है व्रत करने से इंसान खुद पर नियंत्रण कर अपने शरीर की 10 इंद्रियों पर नियंत्रण कर राजा जैसा जीवन जीता है इसके साथ व्रत करने से मनुष्य को बल विद्या बुद्धि का विकास होता है वह इस संसार में बुरे नियम त्याग कर निर्मल और पवित्र बनता जाता है।
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| उपवास, व्रत से आप जीवन बदल सकते हैं। |
व्रत कई प्रकार से किया जा सकता है जैसे बिना पानी बिना भजन बिना अनाज खाएं व्रत बिना पानी पिए बिना बोले एकांत व्रत भक्ति व्रत सनातन धर्म में व्रत अलग-अलग देवी देवताओं के नाम से किया जाता है यह सभी देवी देवता हमारे शरीर के अंदर हैं शरीर के अलग-अलग भाग में जो देवी देवता है उनकी बड़ी-बड़ी पूर्ण ताकत के लिए उनकी पूर्ण शक्ति प्राप्त करने के लिए अलग-अलग व्रत किया जाता है। यह सब देवी देवता प्रकृति के अनुसार इंसान को कर्म फल देते हैं जो जैसे करता है वह वैसा ही फल पता है।
उपवास
व्रत का ही दूसरा नाम उपवास है जिसका अर्थ है ऊंचा जीवन यानी कि ऐसा जीवन जो एक शांत या राजा जीवन जीता है ऊंचे जीवन का अर्थ सुख सुविधा नहीं बल्कि प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना।
व्रत किसका और कैसे करें?
आप वर्तमान में जिसका व्रत करते हैं वह सब देवी देवता हमारे शरीर के अंदर हैं और वह सब प्रकृति की ताकत है इसलिए आपको व्रत के बाद जो कुछ मिलेगा वह प्रकृति की ओर से ही मिलेगा देवी देवता देते हैं लेते नहीं इसलिए कभी अंधविश्वास में मत पड़ना आप जो अच्छा कर्म करोगे उसका फल आपको मिलेगा और कर्म बुरा करोगे तो उसका बड़ा फल मिलेगा और फल देने वाली मां प्रकृति है इसलिए आप सदा मां प्रकृति के लिए व्रत करें क्योंकि वह हमें बिना मांगे ही बहुत कुछ देती है।
विचारों में एकता बल, विद्या, बुद्धि
मनुष्य जीवन में बहुत से विचार आते हैं वह सब विचारों की संख्या कम होकर शक्ति वाले विचार आने शुरू हो जाते हैं जिस प्रकार एक झाड़ू है। बिखरी हुई झाड़ू खुद कचरा बन जाती है और बंधी हुई झाड़ू सारा कचरा साफ कर देती है। इंसान के अंदर मानसिक बल मिलता है और बुद्धि का विकास होता है विद्या मिलती हैं और वह विद्या विनम्रता प्रदान करती है।
बुराई का त्याग और अच्छे नियम
बिना नियम के इंसान इंसान नहीं रहता जिसके कोई नियम नहीं होते वह कहीं भटक सकता है और किसी भी आदत अपना सकता है लेकिन जब वह व्रत करता है तब उसके अंदर से धीरे-धीरे सारी बुराइयां दूर हो जाती है और वह प्रकृति के अनुकूल जीवन जीने लगता है।
इच्छा का त्याग केवल आवश्यकता में ध्यान
जब आप व्रत करोगे आपकी व्यर्थ की इच्छा समाप्त होती जाएगी और आवश्यकता पर बाल बढ़ता जाएगा मनुष्य को जीने के लिए इच्छा जरूरी नहीं आवश्यकता जरूरी है इसलिए आवश्यकता पूर्ण होना जरूरी है।
शरीर की बीमारियां
व्रत करने से शरीर की बहुत सारी बीमारियां नष्ट हो जाएगी अगर किसी को मोटापा है वह व्रत करते हैं मोटापा कम हो जाएगा व्हाट करने वाले का शरीर स्वच्छ स्वस्थ सुंदर और सुडोल निरोग और तंदुरुस्त हो जाता है और वह सुखी जीवन जीता है।
हर 15 दिन में 1 व्रत जरूरी है।
सनातन धर्म में समय-समय पर प्रकृति के नियम अनुसार सभी देवी देवताओं की भर्ती आते रहते हैं यह सब प्रकृति के अनुकूल हैं और व्रत को लेकर उनके पीछे बहुत बड़ी कहानी होती है। इसमें व्रत ऐसी भी होते हैं जो ऋतु के अनुसार होते हैं उन वतन को हमें जरूर करना चाहिए क्योंकि जब मौसम बदलता है तब हमारे शरीर पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ता है जिससे हम बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं। कम से कम हर पखवाड़े में एक बार व्रत जरूर करना चाहिए।

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