पक्का सौदा आश्रम रूहानी कॉलेज सदलपुर

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

वसुधैव कुटुंबकम: क्या आप जानते हैं कि सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है परंतु जाने कैसे?

 प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है। प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) है और हम सब एक ही पिता की संतान है एक घर से आए हैं और एक ही घर जाना है फिर किस बात का लड़ाई झगड़ा है। परमात्मा ने सबको एक समान शरीर दिया है फिर हम क्यों असमानता में जी रहें हैं। परमात्मा ने किसी के शरीर पर जाति पंथ समाज का बंधन नहीं बांधा फिर हम क्यों इन बंधनों में बंधे बैठे हैं इन सब बंधनों से बाहर निकलो इससे निकलने के बाद आप आजाद हो जाओगे जिससे तनाव दूर होकर स्वस्थ और निर्मल जीवन जिओगे। 

संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार परंतु कैसे?

सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है।

जिस प्रकार वृक्ष की एक तरफ की टहनी दूसरी तरफ की टहनी से नहीं मिलती परंतु जड़ एक होती है क्या एक टहनी दूसरी टहनी से कभी मिल सकती है इसी प्रकार हमारा संसार एक जड़ है परंतु टहनियां अलग-अलग इंसान अलग-अलग संसार एक बहुत बड़ा वृक्ष है वृक्ष के बीज धरती पर गिरेंगे तब नए पेड़ उगेंगे इसी प्रकार यह संसार है सोचो और विचार करो हम खुद के परिवार को कितनी पीढि़या तक जानते हैं हमारे दादा परदादा तक जानते हैं उससे आगे की पीढ़ियां कहां है? उनकी संतान हुई वह कहां है किस हालत में है? क्या पता उन्होंने किसी के दबाव में आकर सांसारिक जाति धर्म बदल लिया हो या फिर हो सकता है हम रोजाना मिलते जुलते हो परंतु फिर भी उन्हें नहीं जानते हो सोचो और विचार करो यह संपूर्ण धरती एक परिवार ही है।

परमात्मा ने सब का तन एक जैसा बनाया है।

आज खोज करके देखो जो इंसान आज अलग-अलग धर्म को अपने बैठे हैं क्या उन्होंने यह सब ने सोचा है कि उनका शरीर भी अलग है क्या परमात्मा की तरफ से सभी को एक जैसा शरीर एक जैसे अंग मिले हैं जन्म के बाद उनकी रुपरेखा यह इंसान ही बदलता है परंतु परमात्मा के घर से सभी एक जैसे होते हैं।

सबको एक जैसा मुंह दिया एक जैसा कान एक जैसा नाक एक हाथ पैर यानी शरीर के सभी अंग एक जैसे चाहे वह किसी भी धर्म को मानता हो किसी जाति को मानता हो परंतु परमात्मा के घर में जाति धर्म सब एक हैं। इसलिए एक को मानो जो सर्वशक्तिमान है।

सब का पिता परमपिता परमात्मा 

जिस प्रकार परमपिता परमात्मा ने सबको एक समान अंग दिया है। हम सब उसी की संतान हैं जो इस धारणा को जान लेता है वह जान लेता है कि पूरा संसार ही एक परिवार है। वह संसार में रहता हुआ कभी भी किसी के साथ द्वेष भावना नहीं करता जिस प्रकार एक संत का जीवन होता है संत सभी को अपना समझता है सभी प्राणियों को अपना परिवार समझता है चाहे वह मनुष्य जाति हो चाहे वह पशु, पक्षी जाती जातियां तो पशुओं की पक्षियों की हुआ करती है आपकी जाति मानव है इसलिए मानवता अपनाओ और मानवता के नियम निभाओ मानव कल्याण के लिए जीवन जियो तभी आपका जीवन सफल 

होगा।

आओ सब मिलकर प्रेम से रहे और मां प्रकृति के नियमों (सनातन धर्म) पर चलकर सब समस्याओं का समाधान करें जब हम मां प्रकृति के नियमों पर चलेंगे तब मां प्रकृति अपने पुत्र पर मेहरबान होकर सत का रास्ता बताते जाएगी जिससे सब एक सुंदर और भयमुक्त, प्रेमयुक्त जीवन जी सकेंगे।

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