पक्का सौदा आश्रम रूहानी कॉलेज सदलपुर

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

ज्ञान कैसे होता है या ज्ञान कैसे प्राप्त करें जानें इन प्रश्नों के उत्तर से?

 मनुष्य में ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा सदा से रही है और जब तक मनुष्य है तब तक रहेगी। मनुष्य जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है उसे ज्ञान के साथ अनुभव भी होता जाता है। ज्ञान की जब अच्छी तरह से पारख कर लेता है तब उसे अनुभव हो जाता है। बच्चा पहले अक्षर सिखता है तब उनका उसे ज्ञान होता है जब शब्द लिखना शुरू कर देता है तब उसे अक्षरों का अनुभव हो जाता है और जब कहानी लिखना शुरू करता है, तब उसे शब्दों का अनुभव होता है। इस प्रकार जीवन की अन्य चीजों पर भी यहीं नियम लागू होता है।

जो लोग गलती करते हैं उनसे सीखें और गलती करने से बचे:- 

जो गलती करता है वह आगे बढ़ता है लेकिन हद से ज्यादा गलती से मनुष्य नकारात्मक होता है जिससे मन में हीन भावना आने लगती है। हीन भावना से बचने के लिए, जो व्यक्ति गलती करता है उसको देखे और विचार करें कि गलती हुई कैसे और क्या कारण था कि वह गलती मानी गई। व्यक्ति ने उसका समाधान कैसे दिया और तुम वह गलती ही ना होने दे।

हमें ज्ञान कहां से मिलता है? 

हमारे शरीर की तरह ही कंप्यूटर है जिसको हम पहले कमांड देते हैं फिर प्रोसेस होता है उसके बाद आउटपुट देता है उसी प्रकार जब कोई बाहरी किताब पढ़ते हैं या कुछ देखते हैं यानी 10 इंद्रियों से जो कुछ करते हैं वह हुआ इनपुट कमांड, उसके बाद 10 इंद्रियों से जो किया या देखा वह प्रोसेस के लिए दिमाग में गया उसके बाद हमारा उसके प्रति क्या विचार पैदा हुआ, हमारा क्या विचार बना उसे आउटपुट कहा, इसलिए किसी की बात को सीधे मत अपनाओ, मान लीजिए आपको किसी ने कुछ कहा उसके बाद आप उस पर विचार करें कि यह सही है या गलत यानी अपने दिमाग से कंप्यूटर की तरह ही प्रक्रिया करें। अगर वह सभी परिस्थितियों के लिए सही है तो अपना लें वरना छोड़ दीजिए यानी पूर्ण निर्णय के बाद ही आउटपुट दीजिए।
इन्सान की तरह ही कम्प्यूटर काम करता है।
आप किसी के कहते ही जल्दबाजी में कार्य मत कीजिए। जल्दबाजी में किए हुए कार्य में गलतियां होती है।

जो पिंड सो ब्रह्माण्ड इसको कैसे जाने? 

परमात्मा ने हमें सब कुछ दिया है बहुत धनवान बनाया है। जो आपको बाहर दिखता है चाहे कुछ भी हो वही आपके अंदर है। जैसे आप बाहर 5 तत्व, 25 प्रकृति, सूर्य, चंद्रमा, तारे, गृह, नक्षत्र, देवी, देवता की मूर्ति आदि देखते हैं। वह हमारे शरीर के अंदर भी है बस इसके बारे में आपको ज्ञान प्राप्त करने की आवश्यकता है। आपने देखा और पढ़ा कि जिन विद्वानों के लिखे ग्रंथ, पुराण, शास्त्र देखे वह किसी भी युग में पुराने नहीं होते उनका ज्ञान कभी पुराना नहीं होता, जैसे भगवान श्री कृष्ण द्वारा लिखी हुई भगवदगीता, और सतगुरु अमर आनंद द्वारा लिखा नीता सत ग्रंथ है। इसके अलावा बहुत से ग्रंथ है शब्दावली है, इनमें लिखे हुए शब्द कभी पुराने नहीं होते क्योंकि ग्रंथो को परम शक्ति द्वारा जो पिंड सो ब्रम्हांड और आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तरीके से सिद्ध करके लिखा गया है।

विद्वानों को ज्ञान कहां से होता है वह कहां से सीखते हैं और कैसे लिखते हैं? 

विद्वान कभी भी पुराने ग्रंथ पढ़ कर ज्ञान नहीं प्राप्त करता है, जिस प्रकार उधोगों मे हर बार नया माल, नये तरीके से बनता है पैदा होता है। उसी प्रकार विद्वान नये नये शब्द लिखते हैं, नया ज्ञान पैदा होता है। विद्वानों को ज्ञान अंदर से पैदा होता है। जब वह ध्यान लगाते हैं तब अनावश्यक विचार रुक कर एक बन जाते हैं और उन विचारों में ताकत होती है वे पुराने शब्द नहीं अंतर आत्मा से नए शब्द बनते हैं। यानी ये विचार बुराई से टकराने वाले और अच्छाई को आगे बढ़ाने वाले आते हैं। उस समय जो यह जानता है कि तुमको यह लिखना चाहिए तब वह उन टकराने वाले विचारों की समस्या और समाधान लिखना शुरू कर देता है।
भगवान श्री कृष्ण द्वारा भगवदगीता का ज्ञान और स्वामी अमर आनन्द जी द्वारा नीता सत् ग्रंथ।
 इस प्रकार विद्वान लोग बहुत बड़ा ग्रंथ लिख देते हैं जिससे वर्तमान और आगे आने वाली पीढ़ी को सीख मिलती है।

लिखा कैसे जाता है कुछ नया कैसे लिखें? 

अगर आपको कुछ नया सीखना है तब सुबह जल्दी उठो स्नान करो और ध्यान लगाओ जिसे आप बुराइयों से नफ़रत करने लग जाओगे और अच्छाईयां अपनाना शुरू कर दोगे फिर जो आपके विचारों में प्रशन और उत्तर आएंगे उनको आप लिख लीजिए। जिससे आप बहुत कुछ नया लिख पाएंगे। 

ज्ञान होने के बाद क्या होता है? 

ज्ञान होने के बाद मनुष्य स्थिर हो जाता है और स्थिर मनुष्य कभी नियमों से नहीं डिगता। वह खुद को पहचान लेगा और जिसने खुद को पहचान लिया वहां अपने से दूसरे को और उसके कर्म को पहचान लेगा। उसको यह ज्ञान हो जाएगा कि तुझे इस संसार में क्या करना है, तुम इस संसार में क्यों आये हो? वह इन सब प्रश्नों के उत्तर जान लेता है।

लिखते क्यूं है कारण है? 

विद्वान पुरुष हमेशा यही सोचता है कि जो बुराइयां या तकलीफ हम देख रहे हैं वह ये सब बुराइयां और तकलीफ आने वाली पीढ़ियां ना देखे आगे से आगे बढ़ते जाए और परम पुरुष बन जाए बहुत बड़े विद्वान बन जाए जो लिखा है वह पढ़कर गिरे ना इससे ऊपर ही चढ़ते जाए कभी भी अपनी ऊर्जा को ख़त्म न होने दे जिससे दुनिया में मानव जाति सर्व श्रेष्ठ बन जाए और उच्च स्तर का जीवन जीए।

क्या किताबी ज्ञान से संतुष्टि मिल सकती है? 

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित हुआ ना कोई ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े वहीं पंडित होय। 
ध्यान से बढ़ता ज्ञान 
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषो किताबी ज्ञान आप जितना पढ़ लो लेकिन आपको वह संतुष्टि नहीं मिलेगी जो संतुष्टि खुद को खोज कर जो आपने लिखी। खुद को जानकर जो भी लिखा उसे आत्मा संतुष्टि मिलती है, यह तब ही हो सकता है जब आप खुद से प्रेम करते हो। जब खुद की खोज करेंगे तब प्रेम जगेगा और जो प्रेम से शब्द पैदा हुए जिससे शांति मिलती हैं और ज्ञान बढ़ता जाता है।

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