हमें प्रकृति की पूजा करनी चाहिए जिसमें प्रत्यक्ष देवी देवता सूर्य जिसके कारण मनुष्य को दिखाई देता है, चंद्रमा शीतलता देता है, जल हमारी प्यास बुझाता है, पानी की पूर्ति होती है, अग्नि हमें जमने से बचाती है क्योंकि अग्नि के बिना भोजन भी नहीं पचता, वायु से हमें सांस मिलती है, धरती से अनाज और फल, फूल और मकान, आकाश जिसके खुलेपन में हम रहते हैं, और जिन माता पिता ने हमें जन्म दिया भगवान का रूप होते हैं।
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| मां प्रकृति की पूजा |
पूजा करने से क्या होता है?
मनुष्य जाति ऐसी जाति है जो बिना सिखाए नहीं जान पाती। जो मनुष्य बुरे रास्ते पर चल पड़े तो आगे से आगे वही रास्ते पर चलता रहेगा जो पतन का रास्ता है क्योंकि बुरे के रास्ते से बुद्धि का पतन होता है,जब बुद्धि का पतन होगा तो मनुष्य का पतन निश्चित है क्योंकि उसको यही शिक्षा मिली, जब कोई भलाई के रास्ते की शिक्षा मिली तब वह भलाई के रास्ते पर चलता रहेगा। जब मनुष्य पूजा, अर्चना, ध्यान करता है तब मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान बढ़ता जाता है, जब बुद्धि, ज्ञान बढ़ेंगे तो निश्चित है वह मनुष्य आगे बढ़ेगा। पूजा ध्यान का जीवन में सकारात्मक असर होता है। इससे मन निर्मल, शांत होता है, शांत मन वहां शांति, जहां शांति वहां रामधन और मायाधन।
क्या देवी देवता किसी वस्तु की मांग करते हैं?
देवी देवता किसी भी वास्तु की मांग नहीं करते, किसी भी जीव को काटकर या मरकर मूर्तियों पर चढ़ाना केवल मनुष्य की स्वार्थ की इच्छा है। देवी देवताओं के बहाने वह खुद को भोग लगाते हैं, कोई देवी देवता जीव की बलि नहीं मांगता। देवी देवता शरीर के अंदर हैं, बाहर केवल ज्ञान करने के लिए मूर्ति बनाई गई है इसलिए कि आप अंदर वाले देवी देवता को ना भूल जाएं और वह भी आपकी बुराइयां मांगते हैं बुरे विचारों की मांग करते हैं कि तुम बुराइयां छोड़ दो अच्छाईयों को कर लो लेकिन इंसान इसका उल्टा कर रहा है बुरी अपना रहा है और अच्छी चीजें छोड़ रहा है।
सनातन धर्म में कितने देवी देवता हैं?
मनुष्य 33 करोड़ देवी देवताओं के चक्र में घूम रहे हैं लेकिन असलियत में उनको 33 का भी पता नहीं होता है यह अपने 33 अक्षर हैं, 33 अक्षर की ताकत करोड़ नहीं कोटि है, इसके अलावा 3 महा अक्षर है यानि ब्रह्मा, विष्णु, महेश सनातन धर्म में प्रकृति के नियम हैं जो उन पर चलता है, रहता है। वह सनातनी है, परम पुरुष है।
सबसे बड़ी शक्ति कौन है?
दुनिया में सबसे बड़ी शक्ति मां प्रकृति है, जिसकी वजह से पूरा ब्रह्माण्ड और संसार चलता है, उसके ही सारे नियम हैं, इसलिए मां प्रकृति से बढ़कर कोई नहीं, इसलिए सदा प्रकृति की पूजा करें, परमपिता परमेश्वर की पूजा करें।
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| प्रकृति के पांच तत्व की पूजा |
कर्म का फल कौनसी शक्ति देती है?
जब मनुष्य कर्म करता है, तब कौन मनुष्य, कौन सा कर्म, क्या कर्म और कहाँ करता है, आज कोई किसी के साथ गुनाह कर रहा है, किसी को मार रहा है और उसको किसी ने नहीं देखा, तब भी उसे देखने वाले होते हैं सबसे पहले वह खुद है और खुद के अंदर बैठा खुदा, मालिक, परमपिता परमात्मा, विश्व शक्ति, God Light, यह वो ताकत है जो सब कुछ जानती है, यह वह ताकत है जो चोरी,जारी, हत्या, स्वार्थ, निःस्वार्थ ईमानदारी को उजागर करे वरना इस संसार में परमात्मा और मां प्रकृति को कोई लूट खाता। ये ब्रह्माण्ड की ताकत है जो जैसा करता है उसे वैसा ही फल देती है।
क्या ब्रह्माण्ड में शक्ति होती है?
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| ब्रह्मांड की शक्ति |
हां ब्रह्माण्ड में शक्ति होती है, जिसके कारण यह संसार चक्र चलता रहता है, जिसमें सूर्य, चंदा, तारे, गृह, नक्षत्र, धरती चलते रहते हैं। जिसमें ब्रह्माण्ड की शक्ति द्वारा जोड़ना, तोड़ना, बनाना चलता रहता है। यहीं वह शक्ति होती है जो स्वयं बनाती है और मिटाती है। इसलिए सर्वशक्तिमान् प्रत्यक्ष माँ प्रकृति, परमपिता परमेश्वर
की पूजा करें।



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