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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

कमल के फूल की शिक्षा: जानें देवी देवताओं के हाथ में कमल का फूल क्या दर्शाता है?

 कमल का फूल संतुलन, ज्ञान, अध्यात्म, शांति का प्रतीक और भारत का राष्ट्रीय पुष्प है।

       क्या कहता है कमल का फूल?

कमल का फूल कहता है जैसे मैं रहता हूं वैसे ही आप रहो कीचड़ में जन्म लेता हूं कीचड़ में रहते हुए भी कीचड़ से अलग अध्यात्म की ओर और पूर्ण निर्मल, पवित्र रहता हूं ऐसे ही आप जीवन जियो। 

कमल के फूलों की शिक्षा 

कमल के फूल का महत्व क्या है कहां उगता है और उगकर क्या शिक्षा देता है आपने देखा होगा बहुत सुंदर और कोमल पंखुड़ियां वाला कमल का फूल किसी तालाब या कीचड़ में उगता है और कीचड़ में उगता जरूर है लेकिन जब तक खिला रहता है तब तक कीचड़ से अलग ही रहता है। इसका अर्थ आप क्या समझते हैं? जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में यानी बुराई में उगकर कीचड़ से यानी बुराई से अलग ही रहता है ठीक उसी प्रकार आप भी इस संसार में पैदा होकर संसार से अलग रहो संसार से अलग रहने का अर्थ यह नहीं कि आप समाज के कर्तव्य को छोड़कर पहाड़ों में चले जाओ। इसका अर्थ है कि संसार एक बुराई का घर है इस बुराई रूपी घर में रहकर अपने समाज के संसार के कर्तव्य का पालन करते हुए बुराई से अलग रहो यानी संसार में फंसो मत और अपना फर्ज भी निभाओ।

देवी लक्ष्मी के हाथ में कमल का फूल 

सबको धन माया की जरूरत होती है और जिन लक्ष्मी माता की पूजा करते हैं वह कमल के आसन पर विराजमान है कमल उनका आसन्न है और उनके दोनों हाथों में कमल का फूल है यह क्या दर्शाती हैं? सोचो और विचार करो यह देवी माता लक्ष्मी दर्शाती है कि संसार में रहो लेकिन सांसारिकता से दूर रहो घर परिवार में रहो कर्तव्य का पालन करो लेकिन उससे अलग रहो उसमें फंसे मत तब मेरी तरह बन जाओगे जो मैं हूं वहीं आपको दर्शाती हूं आप भी ऐसे करो मेरी तरह धन-धान्य, सुंदर, निर्मल, सदा एश्वर्यवान, समृद्धि साली हो जाओगे आपके पास धन माया से संबंधित कोई कमी नहीं रहेगी और मेरी तरह पूजनीय बन जाओगे 

संसार के रचयिता ब्रह्मदेव के हाथ में कमल का फूल ब्रह्म देव जो उत्पत्ति का आदेश देते हैं। इस उत्पत्ति के कारण ही संसार चल रहा है इसलिए संसार चलाने वाली तीन महा शक्तियों में सबसे पहले ब्रह्मा का नाम आता है जो सृष्टि के रचयिता संचालन करते हैं उनके हाथ में और उनका आसन्न कमल का फूल है जो यहीं दर्शाते हैं कि संसार में रहो लेकिन बुराई में मत फंसो, मेरे जैसे रचना करने वाले बन जाओगे, वरदान देने वाले बन जाओगे जैसे मैं रहता हूं वैसे ही आप बन जाओगे।

कमल के फूल के माध्यम से देवी देवताओं का निर्देश 

भगवान विष्णु देव कमल का फूल का आसन् और हाथ में कमल का फूल जब आप मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं या किसी धार्मिक स्थान पर, तब आपने देखा होगा कि भगवान विष्णु का आसन्न कमल का फूल है और उन्होंने हाथों में भी कमल का फूल लिया हुआ है, इसका अर्थ यहीं होता है कि आप संसार में रहकर अपने समाज में रहकर कार्य करो लेकिन बुराई से दूर रहकर ऐसा करने से अपने कमल के फूल के गुण आ जाएंगे और आप मेरे जैसे दुनिया के पालनकर्ता बन जाओगे मेरे जैसी शक्तियां आपके पास आ जाएगी।

देवी मां सरस्वती स्वेत वस्त्र धारिणी, निर्मल, ज्ञान की देवी कमल पर विराजमान मां सरस्वती का कमल का फूल का आसन्न है। मां सरस्वती यहीं निर्देश देती है कि तुम सदा संसार में रहते हुए कर्तव्य का पालन करो और सांसारिकता से सदा दूर रहो इससे आप मेरे जैसे ज्ञानवान बन जाओगे और मैं आपकी कंठ कमल में विराजमान होकर बोलना शुरू कर दूंगी जिससे आप जो बोलोगे और लिखोगे वह सत्य होगा। 

दूर निगाहों वाली आठ हाथ, आठ देवियों की शक्ति रखने वाली मां दुर्गा के हाथों में कमल का फूल मां दुर्गा निर्देश देती है कि जब आप संसार में रहकर सांसारिकता में लिप्त न होकर कमल का फूल की तरह जीवन जिओगे तो मैं तुम्हें दूर निगाहों वाला इंसान बना दूंगी आपकी दूर दृष्टि कर दूंगी आप जो भी कार्य करोगे उसका निर्णय आप पहले ही निकाल पाओगे जिससे आपके अंदर भी मेरी तरह 8 हाथों की काम करने की ताकत आ जाएगी। मेरी शक्ति आपमें काम करना शुरू कर देगी।

इसके अलावा कमल के फूलों का उपयोग पूजा के दौरान किया जाता है। कमल के फूल की तरह जिंदगी जीने से बहुत से सांसारिक कार्य अपने आप ही हो जाएंगे इसलिए अपने जीवन में कमल के फूलों के गुण अपनाकर निर्मल, निर्गुण, निर्लिप्त, संतोष, शांति और संतुलन की जिंदगी जिए। 

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