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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

खुद बदलो जग बदलेगा: आप खुद को बदल सकते हैं जाने कैसे?

 परिवर्तन प्रकृति का नियम है प्रकृति कभी एक समान नहीं रहती हर पल बदलती रहती है। यह ब्रह्मांड भी चलता रहता है कभी स्थिर नहीं होता। सभी अपने-अपनी जगह बदलते रहते हैं।

परिवर्तन संसार का नियम है इस नियम के कारण यह संसार चल रहा है। आप इस संसार में आए तब यह संसार है और आप संसार से चले जाओगे आपके लिए कहां संसार रहेगा जिस प्रकार यह प्रकृति बदलती है ठीक उसी प्रकार समय-समय पर मनुष्य को भी बदलना जरूरी है।

खुद बदलो जग बदलेगा 

नीचे लिखे कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात करेंगे कि बदलना क्या है और कैसे बदलें?

खुद बदलो जग बदलेगा यहां बदलने का अर्थ यह मत समझ लेना कि किसी से बात कह कर मुकर जाना या किसी से वादा करके बदल जाना बल्कि बदलने का अर्थ होता है कि अगर आप में कोई गलत आदत है। उसे छोड़ना उसकी जगह अच्छी आदत अपनाना अच्छे नियम अपनाना है।

अगर अच्छी आदत भी नहीं और बुरी आदत भी नहीं तब अच्छी आदत अपनाना जब आप बुरे नियमों को छोड़कर अच्छे नियम अपनाओगे। तब आपको जग बदला हुआ लगेगा खुद में बदलाव के बाद ही आपको संसार बदला हुआ दिखाई देगा।

क्या आप किसी को बदल सकते हैं? 

प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों किसी भी इंसान को बदला नहीं जा सकता केवल उसे जीवन जीने के अच्छे नियम अच्छी आदतें बताई जा सकती है उन अच्छी आदतों पर चलना उन अच्छे नियमों को अपनाना उस व्यक्ति का काम है।

नियम भी वहीं बता सकता है जो खुद नियम पर चलता हो जो खुद ही बुरी आदतें और नियम अपना रखे हैं वह दूसरों को बदलने की बात छोड़ किसी को कहने योग्य नहीं है दूसरों को बदलने के लिए पहले खुद को बदलना पड़ता है इसलिए खुद बदलो जग बदलेगा।

क्या आप किसी को बदलो तब क्या वह आपकी बात मान सकता है? 

शायद वह आपकी बात मान भी ले और ना भी मानी क्योंकि जिस इंसान को कर्म का कर्ज भारी हो यानी बहुत ज्यादा बुरे कर्म किए हो वह जब तक कर्म का कर्ज न चुका दिया जाए तब तक आपकी या किसी की बात नहीं मानेगा।

क्योंकि उनको अपने भारी कर्म का कर्ज चुकाना होता है लेकिन और जब उसका कर्जा पूरा हो जाता है तब वह आपके बताएं अच्छे नियम पर चलना शुरू कर देता है जब आप किसी को बुरे नियम छोड़कर अच्छे नियम अपनाने की बात कहते हैं तब वह बिना देरी के अच्छे नियम

अच्छी आदतें अपना लेता है यह कारण है कि वह इंसान भूल में था भटका हुआ था अच्छे रास्ते की तलाश में था इसलिए उसे अच्छे नियम मिलते ही दिमाग में आते ही अपना लेता है और कारण यह भी होता है कि उसको कर्म का कर्ज नहीं होता।

जो मनुष्य अपने आप को जानकर बदलना चाहे वह बदल सकता है इसके लिए उसके दृढ़ नियम होने चाहिए। ऐसा कोई बिरला ही होता है जो हंस, कौवा वर्ती में चला गया हो तब उसे रास्ता बता दिया जाए कि तुम हंस हो तुम्हारा कौवा वृत्ति में क्या काम है? आप कौवे को हंस बनाने की कोशिश करोगे तब कौवा हंस नहीं बन सकता।

किसी व्यक्ति को बहुत बार बताने पर भी नहीं मानता क्या कारण है? 

जो व्यक्ति बुरी आदत अपना रखी हो आपने उसको अच्छे नियम आदतों के बारे में बताया तब वह कर्म के कर्ज के कारण आपकी बात नहीं मानेगा और अगर आप जिद से मनाने की कोशिश करोगे तो वह सजा आपको भी भुगतान पड़ सकती हैं। यानी सीख उन्हीं को दीजिए जो मानें सीख सवाई।

आप अगर बदलाव देखना चाहते हैं तब पहले खुद में बदलाव कीजिए जिसने खुद को बदला उसने संसार को बदला जिसने खुद को बदला उसने ही जग को बदलते हुए देखा। जिसने खुद को नहीं बदला उसमें बदलाव कहां आएगा? और उसको बदलाव दिखाई नहीं देगा।

बदलाव के लिए आपको बुरी आदतों में बीड़ी, सिगरेट, शराब, कबाब, नशे की पुड़िया, चोरी, जारी हत्या, कड़वा वचन, झूठ, मनसा पाप जो अपना रखा है उसका त्याग करना होगा और उसके लिए अच्छे नियम सादा जीवन, उच्च विचार, ईमानदारी, मीठे वचन, सच्चाई, संतोष, दान, दया, धर्म, परमात्मा की भक्ति जैसे नियम अपनाने होंगे।

इन नियम पर रहकर ही आप खुद के अंदर बदलाव कर सकते हैं नियम सभी के होते हैं देश के भी नियम होते हैं देश भी नियमों पर चलता है देश के नियम उसका संविधान होता है ऐसे ही अपने जीवन का संविधान होता है अपने आप पर संविधान लागू कीजिए बदलाव अपने आप आता जाएगा।

अगर आप खुद में बदलाव नहीं कर सकते इसका अर्थ है आपने खुद से कभी प्रेम नहीं किया और ना ही अपने किसी दूसरे को सच्चा प्रेम किया मनुष्य जब खुद को जान लेता है, खुद को पहचान लेता है। तब उसके लिए नशा विषय तो क्या चीज है वह सब कुछ बदल सकता है।

नियम बदलो संगति बदलो सत्संगति अपनाओ सब कुछ बदल जाएगा मेरा काम है भटके हुए मनुष्य को राह बताना अनुभव करवाना बुरी आदतों और अच्छी आदतों के बारे में मनुष्य को अवगत करवाना। जब तक संसार में रहूंगा तब तक सदा सबको असत का रास्ता छोड़कर सत का रास्ता बताऊंगा। मानें या कोई ना मानें यह मनुष्य पर निर्भर करता है। 

एक बात के दो अर्थ निकलते हैं इसीलिए सकारात्मक अपना लीजिए और नकारात्मक छोड़ दीजिए।

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