जियो सत बोलकर जीयो चाहे 2 दिन झूठ बोलकर 100 साल जीना निष्फल है मत जियो ऐसा जीना
प्रिय ज्ञानी सत्पुरुषों परमपिता परमात्मा ने हमें बहुत ही अच्छा समय दिया है इस पल के लिए इस बाहर मौसम के लिए परमपिता परमात्मा इलाही ताकत खुदा के नूर God Light का धन्यवाद करते हैं हम तो केवल भोजन करते हैं परंतु रक्त का संचार करने वाली ताकत मां प्राकृति, परम शक्ति का धन्यवाद हो जो कण-कण में विद्यमान है।
प्रिय ज्ञानी सतपुरुषों सनातन धर्म हिंदू धर्म मां प्रकृति के नियम है। जो मन प्रकृति जो पिंड सो ब्रह्मांड के अनुकूल है और मां प्रकृति द्वारा प्रदत है इन नियमों में मां प्रकृति की शक्तियां और बुद्धि है ज्ञान है यह इंसान को स्वतंत्र जीवन जीने अपने आप को जान इस शरीर को जानने का सर्वोत्तम रास्ता है सनातन धर्म वह प्राकृतिक धर्म है जो कभी नष्ट नहीं होगा ना ही इसे कोई नष्ट कर सकता है क्योंकि प्रकृति अटल है इसलिए प्रकृति सदा चलती रहेगी इसलिए उसके नियम भी सदा चलते रहेंगे।
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| सबसे पावन और पवित्र धर्म |
लोग अपना धर्म क्यों बदल रहे हैं?
आज के समय जो लोग यह कहकर अपना धर्म बदल रहे हैं कि इस धर्म में यह बंदिश है इस धर्म में बहुत से देवी देवता पूजे जाते हैं इस धर्म में हमारा जीवन खराब हुआ इस धर्म में अशांति मिली इसके लिए प्रिय ज्ञानी सतपुरुषों से आपको अवगत करवाने चाहेंगे किसी भी धर्म में अशांति नहीं होती सभी धर्म अपनी जगह सही है लेकिन तुम चाहे जितना धर्म बदल लो परंतु जब तक अपने नियमों को नहीं बदलोगे मां प्रकृति के अनुकूल जीवन नहीं जियोगे तब तक आपके जीवन में सदा अशांति ही रहेगी जीवन में शांति प्राप्त करने के लिए अपने नियमों को बदल मां प्रकृति के अनुकूल जीवन जीओ जब मन प्राकृतिक अनुकूल जीवन जिओगे तब आपके जीवन में स्वत ही शांति आ जाएगी इसलिए अपना धर्म मत बदलिए सनातन धर्म अपनाइए यह दुनिया का सबसे पावन और पवित्र धर्म है। सनातन धर्म में मां प्रकृति के नियम है जिसमें आप अपना पूर्ण जीवन सुख में और शांति से जी सकते हैं जब सनातन धर्म की चिन्ह स्वास्तिक जिनका बहुत बड़ा महत्व है इस स्वास्तिक में बहुत बड़ा राज छिपा हुआ है। इसी प्रकार अन्य सनातन धर्म के जो चिन्ह बनाए गए हैं वह बहुत महत्वपूर्ण है।
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| धर्म के नियम, चिन्ह और मान्यता |
धन्यवाद उन संत महात्माओं और ऋषि मुनियों को जिन्होंने हमें यह सब खोज करके दी। बाहर मूर्तियां इसलिए बनाई गई है ताकि हम बाहर की मूर्ति को देखकर अंदर की शक्तियों को पहचान सके लेकिन आज का मनुष्य बाहर की मूर्तियों को पकड़ कर बैठ गया। इसको पकड़ कर मत बैठो जो बाहर है उसकी अंदर खोज करो तब असलियत और इंसानी जीवन और चोले को जान पाओगे। चक्र में मत पड़ो अंधविश्वासों से दूर होकर ब्रह्म भ्रांतियां से दूर होकर और मां प्रकृति के नियम अपनाओ सनातन धर्म प्रकृति की पूजा सीखता है। मां प्रकृति की पूजा करो जिसमें जल अग्नि वायु धरती आकाश आते हैं प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य देव की पूजा करो देवी देवता सही है लेकिन इंसान अपने आप को नहीं जानता इसलिए वह भटकता फिरता है सनातन धर्म सत् की ताकत है प्रकृति सर्वशक्तिमान है जो प्रकृति के अनुकूल जीवन जीता है उसकी प्रकृति अपने जैसा दाता बना देती है जो इसकी विरुद्ध चलता है उसे प्रकृति भिखारी नहीं बनती बल्कि वह खुद भिखारी बन जाता है और नरक का जीवन जीता है सनातन धर्म में कोई भी अंधविश्वास, कुरीतियों नहीं अंधविश्वास, कुरीतियां लोगों ने अपना रखें है। यह मानव का विश्वास है इसकी ताकत कोई विरला ही जानता है।
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| धर्म की धारणां |
इन नियमों से जानों की आपने इनमें से कितने नियम अपना रखे हैं इन नियमों में जीवन जीने की सर्वोच्च पद्वती है।
तजने वाले नियम :-
- चोरी
- जारी
- हत्या
- कड़वा वचन
- झूठ
- हीन विचार
- चुगली
- चापलूसी
- ईर्ष्या
- घमंड
- मनषा पाप
- नशा विषय
- पराई निन्दा
- भय
- छल
- कपट
- पराई आस
- क्रोध
- संसारी मोह
- तृष्णा
अपनाने वाले नियम:-
- ईमानदारी
- शांति
- संतोष
- कहनी और करनी एक
- शीलता
- दया
- धर्म
- उच्च विचार
- जागृत में रहना
- गम खाना
- मीठा बोलना
- न्यायकारी
- पर स्वार्थ
- सादा जीवन
- गुरु मर्यादा में रहना
- कुल मर्यादा में रहना
- प्रेम
- नम्रता
- चौबीस घंटे में 2.30 घंटे भजन करना
लोगों की सोच और डर
मुझे घर त्यागना पड़ेगा
हमारा तो घर बार छूट जाएगा
हम कमा कर कहां से खाएंगे
परंतु यह है उनका भ्रम है तुम कुल मर्यादा में रहकर सब नियमों का पालन कर सकते हो यह नियम बंधन नहीं आजादी है इन नियमों को जानू जो सनातन के नियमों को मन वही सनातनी और हिंदू है जब आप स्कूल में पढ़ते थे तब स्कूल के नियम अपनाते हो तब ही विद्यार्थी कहलाते हो इसी प्रकार सनातन धर्म केवल नाम से नहीं उनके नियम अपनाओ तभी सनातनी कहलाओगे। अगर आपने भगवान श्री कृष्ण को माना लेकिन उनके नियम नहीं माने तब कहां अपनी श्री कृष्ण को माना अपने स्वामी अमर आनंद जी को माना लेकिन उनके नियमों को नहीं अपनाया तब आपने कहां माना। परमात्मा ने हमें अपना खुद का रूप देकर भेजा है मुक्ति कहीं नहीं जगत का जीना ही मुक्ति है स्वर्ग कहीं नहीं यही धरती है स्वर्ग, इसमें आप प्रकृति के नियम पर चलकर प्रकृति के नियम अपना लीजिए जो है सनातन धर्म, जो उसके नियमों पर रहता है वही सच्चा सनातनी।



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