पक्का सौदा आश्रम रूहानी कॉलेज सदलपुर

शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

ध्यान क्या है, ध्यान कैसे लगाएं और जानों ध्यान लगाने से क्या-क्या होता है?

  ध्यान क्या है और कैसे लगाएं?

 ध्यान है आंतरिक स्नान, एक ऐसा स्नान जिससे शरीर की सारी बीमारियां नष्ट हो जाती है और बुद्धि का आना। तन और मन शांत होकर निर्मल पूर्ण पवित्र बन जाता है। जिसमें हरी भरी हरियाली उपजने लगती है।

 पानी से हम बाहृय स्नान करते हैं परंतु यह अंदर का स्नान है जिससे शरीर में घट गंगा बहती है उससे शरीर का मल साफ हो जाता है यानी मल भी अमृत बन जाता है जो शरीर में सहयोग करता है। ध्यान से मल रस में बदल जाता है और तन निर्मल मन शांत होता है इसके बाद ध्यान लगता है और संसार तुल जाता है।

ध्यान मग्न 
 तुम इस संसार में किस लिए आए और

 सोचता है क्या पाया और क्या खाया

 ध्यान कैसे लगाएं?

 ध्यान लगाने के लिए आप सुबह जल्दी उठकर स्नान कीजिए शांत और एकांत स्थान पर बैठ जाइए, ज्ञान के लिए आप शुरुआत में अनुलोम विलोम भी कर सकते हैं लंबी सांस लेने और छोड़ने से ध्यान लगना शुरू हो जाएगा। इसके बाद आप नाभि में ध्यान लगाए यह ब्रह्म का स्थान है यहां ध्यान लगाने से आप शरीर और बाहर की भड़काने वाली चीजों को भूल जाओगे उसके बाद शरीर पूर्ण रूप से ढीला हो जाएगा यानी आपकी तनाव रूपी जकड़न छूट जाएगी और शरीर एकदम सीधा हो जाएगा।

 ध्यान से क्या-क्या होता है?

 जब आपका ध्यान लगना शुरू होगा तब आंखों से आंसू, मुख से जुम्बाई (उबासियां) आना शुरू हो जाएगी।

 जब आंखों से आंसू आएंगे तो आंखें बिल्कुल साफ हो जाएगी ऐसा लगेगा जैसे नया सवेरा हुआ है इसके बाद तालू से कंठ कवंल मे रस की बूंदें गिरने लगेगी। वह रस की बूंद अमृत के समान है जिसे घट गंगा कहते हैं। धीरे-धीरे आपका शरीर आनंद में होने लग जाएगा और तनाव मुक्त होकर हल्का हो जाएगा। हल्की चीज हवा में उड़ने लगती है उसी प्रकार आप शरीर से बाहर आना शुरू हो जाओगे ऐसा अनुभव होगा कि अब शरीर और आत्मा अलग हो रहे हैं आत्मा और शरीर का अंतर पता चलने लगेगा इसके बाद आपका ध्यान जम जाएगा। ध्यान लगाने से बड़े-बड़े विचार आने लगते हैं। सोच बढ़ती जाती है। 

रोजाना ध्यान लगाने से विचार सख्त होकर प्रकृति नियम पर चलने को अग्रसर करेंगे शरीर की ताकत बढ़ती जाएगी और उससे कहीं ज्यादा मानसिक ताकत आ जाएगी मानसिक ताकत आने के बाद मनुष्य अपने नियम पर अधिक हो जाएगा ऐसा मनुष्य कभी भी किसी भी कठिनाई में नहीं दिखने वाला सदा अपनी बात पर रहने वाला बन जाता है क्योंकि ध्यान लगाने से वह पिंड और ब्रह्मांड की ऊर्जा को जान लेता है और सोचेगा मैं इतना समय व्यथा में क्यों गवा दिया बीते समय का धोखा होगा लेकिन ध्यान लगाते रहना सब धोखो से पार हो जाओगे वह ब्रह्मांड की ताकत जो सर्वशक्तिमान है। ऐसे मनुष्य की कहनी और करनी एक हो जाती है और इंसान सदा अपने नियमों पर रहता है और खुशहाली से निर्मल पवित्र जीवन जीता है। जिस प्रकार बारिश होने के बाद फसले हरी भरी हो जाती है उसी प्रकार ध्यान लगाने से मनुष्य का शरीर हरा भरा हो जाता है।

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